इस कंपनी की तूती ऐसे ही नहीं बोलती

आधारभूत ढांचे के निर्माण में अव्वल कंपनी लार्सन एंड टुर्बो की चर्चा
दुनिया में ऐसे ही नहीं होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई के जिस अटल
सेतु का 12 जनवरी 2024 का उद्घाटन ने किया उसे भी इसी कंपनी ने बनाया है। इसके
अलावा राम मंदिर, केवडिया का स्टेचू ऑफ युनिटी के निर्माण भी इसी कंपनी ने किया
है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई ट्रांस-हार्बर लिंक यानी अटल सेतु का
उद्घाटन किया। यह देश का सबसे लंबा पुल है और इंजीनियरिंग का एक नमूना है। इसका
अधिकांश निर्माण इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की सबसे दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो
ने बनाकर एक कीर्तिमान स्थापित किया है।
इस कंपनी की स्थापना आजादी से पहले हुई थी। डेनमार्क से आए दो
इंजीनियरों ने इस कंपनी को बनाया था और आज यह दुनिया की टॉप कंस्ट्रक्शन कंपनियों
में से एक है। इसने भारत और दुनिया में कई प्रोजेक्ट बनाए हैं। इनमें गुजरात में
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, नरेंद्र मोदी
स्टेडियम और राउरकेला में बिरसा मुंडा हॉकी स्टेडियम शामिल है। कंपनी अयोध्या में
भगवान राम का मंदिर भी बना रही है। अटल सेतु यानी मुंबई ट्रांस-हार्बर लिंक देश का
सबसे लंबा पुल है। करीब 17,840 करोड़ रुपये
से अधिक की लागत से बना यह पुल 21.8 किमी लंबा है।
समुद्र के ऊपर इसकी लंबाई लगभग 16.5 किमी और जमीन
पर लगभग 5.5 किमी है।
इसके निर्माण में 177,903 मीट्रिक टन
स्टील और 504,253 मीट्रिक टन
सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है। यह अपने आप में इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ नमूना
है। इसका 14 किमी लंबा
हिस्सा एलएंडटी ने बनाया है। इसमें भारत में पहली बार ऑर्थोट्रॉपिक स्टील डेक का
इस्तेमाल किया गया है। मरीन कंस्ट्रक्शन और अंडरवाटर पाइलिंग के लिए एडवांस्ड
टेक्नीक्स का यूज किया गया। करीब 17,840 करोड़ रुपये
की लागत से बना यह लिंक भारत का सबसे लंबा पुल है।
गुजरात के केवड़िया में नर्मदा नदी के किनारे सरदार वल्लभ भाई पटेल की
मूर्ति स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण भी इसी कंपनी ने किया है। 182 मीटर ऊंची यह
दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति है। इस पूरा करने के लिए 300 इंजीनियरों और 3000 श्रमिकों ने
लगभग साढ़े तीन साल तक काम किया था। इसे बनाने के लिए 70,000 टन सीमेंट, 25,000 टन स्टील, और 12,000 कॉपर पैनल का इस्तेमाल किया गया है। स्टैच्यू के अंदर चार हाई-स्पीड
लिफ्ट हैं। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि भूकंप के तेज झटके या 60 मीटर/सेकेंड
जितनी हवा की रफ्तार भी इस प्रतिमा का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी।





