चारा घोटाला मामले में लालू यादव की मुश्किलें फिर बढ़ीं: सजा बढ़ाने की सीबीआई याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट करेगा सुनवाई, बिहार की सियासत में मचा घमासान

चारा घोटाला मामले में लालू यादव की मुश्किलें फिर बढ़ीं: सजा बढ़ाने की सीबीआई याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट करेगा सुनवाई, बिहार की सियासत में मचा घमासान
रांची/पटना, 9 जुलाई 2025
चर्चित चारा घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर गहराती नजर आ रही हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा उनकी सजा बढ़ाने की याचिका को झारखंड हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। हाईकोर्ट के इस फैसले ने बिहार की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है, खासकर उस समय जब राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं और राजद एक बार फिर खुद को सत्ता में लाने के लिए राजनीतिक रणनीति में जुटा है।
सीबीआई ने अपनी याचिका में कहा है कि चारा घोटाले में लालू यादव की भूमिका गंभीर और महत्वपूर्ण थी, और उन्हें जो सजा पहले दी गई, वह उनके अपराध की गंभीरता के अनुपात में नहीं है। सीबीआई का तर्क है कि एक बड़े पैमाने पर सरकारी धन की लूट, भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोपों को देखते हुए अदालत को लालू यादव की सजा में कठोरता लानी चाहिए। अब जब झारखंड हाईकोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई की अनुमति दे दी है, तो ऐसी संभावना प्रबल हो गई है कि लालू यादव को एक बार फिर जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ सकता है।
यह घटनाक्रम राजद और लालू परिवार के लिए न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक मोर्चे पर भी बड़ा झटका साबित हो सकता है। फिलहाल राजद के रणनीतिक संचालन की बागडोर तेजस्वी यादव संभाले हुए हैं, लेकिन पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर मंडराते इस नए खतरे ने संगठनात्मक और चुनावी तैयारियों को झटका देने का काम किया है। पार्टी प्रवक्ताओं ने इसे "राजनीतिक साजिश" करार देते हुए कहा है कि केंद्र सरकार और सीबीआई मिलकर विपक्षी दलों को कमजोर करने का षड्यंत्र रच रही है।
वहीं भाजपा और एनडीए इस निर्णय को न्यायिक प्रक्रिया की जीत और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सशक्त कदम बता रहे हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी ने बयान जारी कर कहा, "यह कोई राजनीतिक बदले की कार्रवाई नहीं है बल्कि न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। लालू यादव जैसे नेताओं को उनके कर्मों की सजा मिलनी ही चाहिए, ताकि भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश जाए।"
चारा घोटाला, जिसमें 950 करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी राशि की फर्जीवाड़ा कर विभिन्न पशुपालन विभागों के माध्यम से निकासी की गई थी, लालू यादव की राजनीतिक छवि पर हमेशा एक बड़ा दाग रहा है। यह मामला 1990 के दशक में सामने आया था और इसके बाद से ही लालू यादव कई बार जेल जा चुके हैं। अब जबकि इस मामले में सजा को लेकर पुनर्विचार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत इस बार क्या निर्णय लेती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि झारखंड हाईकोर्ट सीबीआई की दलीलों से सहमत होता है और सजा में वृद्धि करता है, तो यह फैसला लालू यादव की राजनीतिक सक्रियता पर पूर्णविराम लगाने का काम कर सकता है। वहीं चुनावी मौसम में यह घटना विपक्षी एकता और गठबंधन के समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है, क्योंकि राजद बिहार की राजनीति में विपक्ष की धुरी मानी जाती है।
अब सभी की निगाहें झारखंड हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी होंगी, जहां से आने वाला फैसला न केवल लालू यादव के राजनीतिक भविष्य बल्कि बिहार की सियासी दिशा को भी प्रभावित करने वाला साबित हो सकता है।





