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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:22 · नई दिल्ली संस्करण

कोरबा में 1600 मेगावाट विस्तार पर घमासान, जनसुनवाई से पहले उठे गंभीर पर्यावरणीय सवाल

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
कोरबा में 1600 मेगावाट विस्तार पर घमासान, जनसुनवाई से पहले उठे गंभीर पर्यावरणीय सवाल

कोरबा। कोरबा पावर लिमिटेड की प्रस्तावित 1600 मेगावाट ताप विद्युत विस्तार परियोजना को लेकर क्षेत्र में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। आज शुक्रवार को आयोजित जनसुनवाई से पहले स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने परियोजना के पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभावों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।ग्रामीणों का कहना है कि कोरबा पहले से ही प्रदूषण की मार झेल रहा है। क्षेत्र में संचालित कई ताप विद्युत संयंत्रों और खनन गतिविधियों के कारण वायु गुणवत्ता लगातार चिंता का विषय रही है। ऐसे में अतिरिक्त 1600 मेगावाट क्षमता जोड़ने से प्रदूषण का स्तर और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। लोगों का आरोप है कि परियोजना के ड्राफ्ट पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) में संचयी प्रभाव (Cumulative Impact) का समुचित और पारदर्शी विश्लेषण प्रस्तुत नहीं किया गया है।परियोजना के लिए हसदेव नदी से प्रतिवर्ष लगभग 86 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी लेने का प्रस्ताव है। किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के मौसम में पहले ही जल संकट की स्थिति बन जाती है, ऐसे में अतिरिक्त जल दोहन से पेयजल और सिंचाई प्रभावित हो सकती है।राख (फ्लाई ऐश) प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। दस्तावेज़ में 100 प्रतिशत उपयोग का दावा किया गया है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में भी ऐश डंपिंग और धूल प्रदूषण की शिकायतें सामने आती रही हैं। भूजल प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर स्वतंत्र अध्ययन की मांग की जा रही है।रोजगार के मुद्दे पर भी असंतोष है। ग्रामीणों का कहना है कि स्थायी रोजगार सीमित होंगे और स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने की स्पष्ट गारंटी नहीं दी गई है।जनसुनवाई को लेकर प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं, लेकिन क्षेत्र में यह सवाल गूंज रहा है कि क्या विकास की कीमत पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से चुकाई जाएगी। अब सबकी निगाहें जनसुनवाई की कार्यवाही और आगे की पर्यावरणीय मंजूरी पर टिकी हैं।

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