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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:42 · नई दिल्ली संस्करण

बलरामपुर : कन्हर का जलस्तर अंतिम पायदान पर, सूखती धारा में अवसर, मछुआरों की ‘बल्ले-बल्ले’

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
बलरामपुर : कन्हर का जलस्तर अंतिम पायदान पर, सूखती धारा में अवसर, मछुआरों की ‘बल्ले-बल्ले’

बलरामपुर। जीवनदायिनी कन्हर नदी अब खुद जीवन के लिए जूझती नजर आ रही है। रामानुजगंज क्षेत्र में नदी का जलस्तर तेजी से गिरकर लगभग समाप्ति की कगार पर पहुंच गया है। एनीकट में जो पानी कल तक मौजूद था, वह अब गेट से रिसते-रिसते खत्म होने की स्थिति में है। यदि जल संसाधन विभाग ने तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया, तो आने वाले दिनों में कन्हर नदी पूरी तरह सूख सकती है। इसका सीधा असर नगर की 20 हजार से अधिक आबादी पर पड़ेगा, जहां पेयजल संकट गहराने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं।उल्लेखनीय है कि, गर्मी अभी अपने चरम पर भी नहीं पहुंची है। ऐसे में शुरुआती दौर में ही नदी का यह हाल भविष्य के गंभीर जल संकट की ओर इशारा कर रहा है। यदि समय रहते पानी का संरक्षण और प्रबंधन नहीं किया गया, तो घर-घर तक पेयजल आपूर्ति बाधित होना तय माना जा रहा है।नदी का जलस्तर घटते ही एक ओर जहां आमजन चिंतित हैं, वहीं मछुआरों के लिए यह स्थिति “मौका” बन गई है। बड़ी संख्या में लोग जाल लेकर नदी में उतर चुके हैं और मछली पकड़ने में जुटे हैं। हालांकि, इस बीच एक गंभीर खतरा भी सामने है। पूर्व में कई बार मछली पकड़ने के लिए नदी में जहरीले केमिकल का इस्तेमाल किया जा चुका है, जिससे जलजीवों के साथ-साथ पर्यावरण पर भी विपरीत असर पड़ता है।रामानुजगंज पुलिस ने इसी माह 4 अप्रैल को कार्रवाई करते हुए तीन मछुआरों को रंगे हाथों केमिकल डालकर मछली मारते हुए गिरफ्तार कर जेल भेजा था।वर्तमान में नगरपालिका प्रशासन नदी के बीच बनाए गए डबरी और पुराने कुओं के सहारे नगर के सभी 15 वार्डों में पेयजल आपूर्ति कर रहा है। फिलहाल स्थिति नियंत्रित दिखाई दे रही है, लेकिन जलस्तर में लगातार गिरावट से यह व्यवस्था भी ज्यादा दिनों तक टिक पाना मुश्किल लग रहा है।मामले को लेकर जल संसाधन विभाग के एसडीओ आशीष जगत से बात की गई। उन्होंने बताया कि वे फिलहाल निजी कार्य से बाहर हैं और दो दिन बाद रामानुजगंज पहुंचकर कन्हर नदी का निरीक्षण करेंगे। साथ ही, एनीकट के गेट की स्थिति जांचने के लिए इंजीनियर को तत्काल भेजने की बात कही है।कन्हर नदी का सूखना केवल इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों के लिए भी गंभीर संकट का संकेत है, जो पूरी तरह इसी जलस्रोत पर निर्भर हैं। मनुष्य किसी न किसी तरह पीने के पानी की व्यवस्था कर भी ले, लेकिन बेजुबान जीवों के सामने जीवन का बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है। ऐसे में कन्हर को बचाना सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक जिम्मेदारी बन जाती है।

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