सीबीआई और अबूधाबी NCB का संयुक्त ऑपरेशन: अंतरराष्ट्रीय रेड नोटिस आरोपी मुस्तफा कुब्बावाला को भारत लाया गया

सांगली में सिंथेटिक ड्रग फैक्ट्री चलाने का आरोपी, मुंबई पुलिस को लंबे समय से थी तलाश
नई दिल्ली/मुंबई, 11 जुलाई 2025 | केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग इकाई (IPCU) ने एक और बड़ी सफलता हासिल करते हुए अबूधाबी NCB के सहयोग से रेड नोटिस आरोपी मुस्तफा कुब्बावाला को भारत वापस लाने में सफलता पाई है। यह गिरफ्तारी 11 जुलाई 2025 को एक उच्चस्तरीय प्रत्यर्पण अभियान के तहत की गई, जिसमें भारतीय एजेंसियों की सटीक योजना, अंतरराष्ट्रीय समन्वय और कानूनी सक्रियता की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
मुस्तफा कुब्बावाला पर आरोप है कि वह विदेश में रहते हुए महाराष्ट्र के सांगली जिले में सिंथेटिक ड्रग (मेफेड्रोन) का अवैध निर्माण करने वाली फैक्ट्री का संचालन कर रहा था। यह फैक्ट्री मुंबई पुलिस की एंटी नारकोटिक्स सेल द्वारा की गई छापेमारी के दौरान उजागर हुई थी। छापेमारी में 126.141 किलोग्राम मेफेड्रोन जब्त किया गया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत 2.522 करोड़ रुपये आँकी गई है। यह ड्रग्स कुब्बावाला और उसके सहयोगियों द्वारा कथित रूप से भारत के विभिन्न हिस्सों में फैलाए जाने की योजना थी।
मुंबई पुलिस की जांच में यह सामने आया कि मुस्तफा कुब्बावाला विदेश में बैठकर डिजिटल माध्यमों और फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारत में फैक्ट्री संचालन की निगरानी कर रहा था। उसने संगठित अपराध के रूप में ड्रग निर्माण, वितरण और मनी लॉन्ड्रिंग का जाल फैला रखा था। उसके खिलाफ चार्जशीट दायर की जा चुकी है और न्यायालय द्वारा ओपन डेटेड गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया गया था।
कुब्बावाला को इंटरपोल द्वारा जारी रेड कॉर्नर नोटिस के तहत ट्रैक किया गया था और IPCU-CBI की तकनीकी निगरानी के बाद अबूधाबी में उसकी उपस्थिति की पुष्टि हुई। इसके पश्चात भारत सरकार ने अबूधाबी के अधिकारियों से विधिवत संपर्क और प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा। लम्बी कूटनीतिक और कानूनी प्रक्रिया के बाद अंततः उसे भारत लाया गया, जहाँ अब उसे मुंबई पुलिस के हवाले कर दिया गया है।
CBI के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "यह मामला इस बात का उदाहरण है कि अंतरराष्ट्रीय अपराधी चाहे जितनी भी दूरी पर हो, भारत की एजेंसियां उसे न्याय के कटघरे तक लाकर रहेंगी।" उन्होंने कहा कि IPCU और इंटरपोल सेल ने हाल के वर्षों में ऐसे कई अपराधियों को सफलतापूर्वक ट्रैक और प्रत्यर्पित किया है।
ड्रग्स से जुड़े अपराधों को लेकर भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं। मेफेड्रोन जैसे सिंथेटिक ड्रग्स देश में युवाओं को बर्बादी की ओर धकेल रहे हैं, और इसी के मद्देनज़र केंद्र व राज्य सरकारें "ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति" अपना रही हैं।
मुस्तफा कुब्बावाला की वापसी भारत की एजेंसियों की एक बड़ी जीत मानी जा रही है, जो यह संदेश देती है कि चाहे अपराधी कितनी भी दूर और छुपकर काम कर रहे हों, कानून के लंबे हाथ उन्हें अंततः पकड़ ही लेते हैं। आने वाले दिनों में उसकी न्यायिक हिरासत, पूछताछ और उससे जुड़े अन्य नेटवर्क का पर्दाफाश इस मामले को और भी गहराई से उजागर करेगा।यह मामला सीबीआई, इंटरपोल और मुंबई पुलिस की साझा सफलता है, भारत अब अंतरराष्ट्रीय अपराध नियंत्रण में पहले से कहीं अधिक सशक्त और संगठित होकर कार्य कर रहा है।





