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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:12 · नई दिल्ली संस्करण

रामावतार जग्गी हत्याकांड: आज हाईकोर्ट में सुनवाई, सीबीआई की 11 हजार पन्नों की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
रामावतार जग्गी हत्याकांड: आज हाईकोर्ट में सुनवाई, सीबीआई की 11 हजार पन्नों की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में आज निर्णायक मोड़ आ सकता है। उच्च न्यायालय की स्पेशल डिवीजन बेंच में अंतिम सुनवाई होनी है, जहां सीबीआई की विस्तृत जांच रिपोर्ट और पुराने फैसलों की समीक्षा के आधार पर महत्वपूर्ण निर्णय आने की उम्मीद है।मामले की सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की विशेष डिवीजन बेंच गठित की गई है। इस बहुचर्चित केस में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 11 हजार पन्नों की जांच रिपोर्ट पेश की है, जिसमें कई आरोपितों के साथ अमित जोगी के खिलाफ भी आरोप दर्ज किए गए हैं।यह मामला उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर दोबारा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में खोला गया है। इससे पहले उच्च न्यायालय ने 1 अप्रैल को अंतिम सुनवाई की तारीख तय की थी। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान सभी पक्षों—सीबीआई, राज्य सरकार, सतीश जग्गी और अमित जोगी के वकील ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं।सुनवाई के दौरान अमित जोगी के वकील ने कोर्ट को बताया कि उन्हें केस से जुड़ी फाइल उपलब्ध नहीं कराई गई है, इसलिए जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया जाए। इस पर अदालत ने समय देने से इनकार करते हुए सीबीआई को तुरंत फाइल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।इस मामले में पहले सीबीआई ने 29 लोगों को आरोपी बनाया था। ट्रायल के दौरान 28 आरोपिताें को दोषी ठहराया गया, जबकि अमित जोगी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया था। अब केस दोबारा खुलने के बाद सीबीआई की विस्तृत रिपोर्ट पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।करीब दो साल पहले उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने दोषियों की अपील खारिज करते हुए आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। बाद में उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई की अपील स्वीकार कर मामले को दोबारा उच्च न्यायालय भेज दिया, ताकि विस्तृत सुनवाई हो सके।4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपित बनाया गया था, जिनमें से दो सरकारी गवाह बन गए थे। शेष 28 आरोपितों को सजा हुई थी। हालांकि 2007 में विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। इसके खिलाफ सतीश जग्गी ने उच्चतम न्यायालय में अपील की थी, जिसके बाद मामला दोबारा उच्च न्यायालय में सुनवाई के लिए आया।पीड़ित पक्ष की ओर से यह तर्क दिया गया कि हत्या एक सुनियोजित साजिश थी और इसमें प्रभावशाली लोगों की भूमिका रही। वहीं, बचाव पक्ष ने पहले की तरह साक्ष्यों के अभाव का हवाला दिया है।आज होने वाली अंतिम सुनवाई को इस लंबे समय से चले आ रहे मामले का अहम पड़ाव माना जा रहा है। अदालत के फैसले से इस बहुचर्चित केस की दिशा तय होगी।

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