विदेश मंत्री अचानक ईरान पहुंचे, ईरानी राष्ट्रपति से की मुलाकात

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ईरान पहुंचे और वहां के विदेश मंत्री और राष्ट्रपति से मुलाकात की। भारतीय विदेश मंत्री की ईरान की यह यात्रा काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जयशंकर ने 15 जनवरी यानी सोमवार को ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाह्यान से मुलाक़ात की।
जयशंकर ने कहा, ''हमने भारत के आसपास के क्षेत्र में भी कुछ हमले देखे हैं। यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बड़ी चिंता का विषय है. ज़ाहिर है कि इससे भारत के हितों को भी खतरा पैदा हो रहा है। इस तरह के हालात से किसी को फ़ायदा नहीं होगा। यस जयशंकर ने अपने बयान में फ़लस्तीन का ज़िक्र करते हुए कहा, ''मैं ये बात दोहराता हूं कि फ़लस्तीन के मुद्दे पर भारत दो राष्ट्र सिद्धांत का समर्थन लंबे वक़्त से करता रहा है, जहां फ़लस्तीनी लोग एक आज़ाद और सुरक्षित सरहदों वाले देश में खुलकर रह सकें। मैं सभी पक्षों से उकसावे की कार्रवाई ना करने और बातचीत, डिप्लोमेसी के रास्ते पर आगे बढ़ने की ज़रूरत पर ज़ोर देता हूं
राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने इस मुलाक़ात में भारत और ईरान के बीच हुए समझौतों को लागू करने और तेज़ी लाने पर ज़ोर दिया गया है। इन समझौतों में चाबहार प्रोजेक्ट भी शामिल है। रईसी ने ये भी कहा कि जो समझौते भारत ईरान के बीच हुए, उनमें आई देरी की क्षतिपूर्ति किए जाने की ज़रूरत है। भारत ईरान में चाबहार पोर्ट को विकसित कर रहा है और रईसी इसी पोर्ट के काम में आई देरी की तरफ़ इशारा कर रहे थे। चाबहार को लेकर कहा जा रहा है कि प्रोजेक्ट में देरी के कारण भारत से ईरान ख़ुश नहीं है।
ईरान चाहता है कि भारत इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा करे। इस मामले में भारत की तुलना चीन से की जाती है कि चीन अपनी परियोजनाओं को जल्दी लागू कर देता है जबकि भारत ऐसा नहीं कर पाता है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के पास पैसे और संसाधन की कमी नहीं है इसलिए वह भारी पड़ता है।





