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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:20 · नई दिल्ली संस्करण

J&K पर पाकिस्तान-OIC को भारत का करारा जवाब: जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न अंग

राष्ट्रीय सागर डेस्क4 मिनट का पठन
J&K पर पाकिस्तान-OIC को भारत का करारा जवाब: जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न अंग

जिनेवा। भारत ने पाकिस्तान के बेबुनियाद और गलत इरादे वाले आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। इसके साथ ही, इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) की तरफ से भारत के केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को लेकर किए गए जिक्र को भी खारिज कर दिया। भारत ने दोहराया कि यह इलाका देश का 'एक अभिन्न और अविभाज्य' हिस्सा है।

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार परिषद के 62वें सत्र में भारत के स्थानीय मिशन की प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने कहा, “भारत को लेकर पाकिस्तान और ओआईसी द्वारा की गई टिप्पणियों के जवाब में भारत अपना उत्तर देने के लिए बाध्य है। हम पाकिस्तान के लगाए बेबुनियाद और गलत इरादे वाले आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हैं।

हम ओआईसी की तरफ से जम्मू और कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी को भी पूरी तरह से खारिज करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान का यह प्रचार उसके घरेलू मोर्चे पर विफलताओं और आतंकवाद को दिए जा रहे समर्थन को छिपाने की कोशिश है। ओआईसी समन्वयक की भूमिका का उसका दुरुपयोग केवल इस भ्रामक अभियान को और उजागर करता है।

ऐसे प्रचार को महत्व देने की हमारी कोई इच्छा नहीं है।

उन्होंने कहा, “लेकिन, हम कुछ बातें कहना चाहेंगे। रिकॉर्ड के लिए, जम्मू और कश्मीर भारत का एक जरूरी और अटूट हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। एकमात्र अनसुलझा मुद्दा भारतीय इलाकों पर पाकिस्तान का गैरकानूनी कब्जा और उसे वापस करना है। पाकिस्तान का प्रोपेगैंडा पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर में दमन की सच्चाई को छिपा नहीं सकता।

अनुपमा सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में फैली अशांति दशकों के दबाव, सैन्य नियंत्रण और बुनियादी अधिकारों से वंचित करने का नतीजा है। गैरकानूनी और गलत तरीके से किया गया नियंत्रण सिर्फ ताकत के दम पर ही कायम रह सकता है।

उन्होंने कहा, “रावलकोट में चल रही दुखद घटना, सैकड़ों आम लोगों की हत्या और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में बेरहमी से कार्रवाई, जबरदस्ती कब्जे और दबाव के जरिए बनाए गए सिस्टम का नतीजा है। दशकों से पाकिस्तानी सेना जमीन पर कब्जा, जनसंख्या संरचना में सुनियोजित बदलाव और बुनियादी आजादी से वंचित करने से हालात ऐसे हो गए हैं कि रोटी, बिजली, अधिकार और सम्मान की मांग कर रहे लोगों को भी गोलियों और क्रूरता का सामना करना पड़ रहा है। इससे किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए।

एक गैर-कानूनी कब्जा सिर्फ जबरदस्ती से ही बनाए रखा जा सकता है।”

सिंह ने पाकिस्तान पर यह भी आरोप लगाया कि वह आतंकवाद को सरकारी नीति के तौर पर अपना रहा है, जबकि साथ ही खुद को आतंकवाद का शिकार बता रहा है।

भारत के स्थानीय मिशन की प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने कहा, “यह वह देश है जहां के मौजूदा रक्षा मंत्री आतंकवादियों को आश्रय देने, प्रशिक्षण देने और तैनात करने को सरकारी नीति बताते हैं और फिर भी पाकिस्तान खुद को आतंकवाद का पीड़ित कहता है। वास्तव में, यह एक ऐसा विरोधाभास है जिसे सिर्फ पाकिस्तान ही बनाए रख सकता है। यह एक 'फ्रेंकस्टीन राज्य' का जीता-जागता उदाहरण है, जिसे तब आश्चर्य होता है जब उसका अपना ही रचा हुआ राक्षस उसे काटने लगता है।

सिंधु जल संधि को लेकर टिप्पणी करते हुए अनुपमा सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के लिए सहयोग और सद्भावना का फायदा उठाना और आतंकवाद को सरकारी नीति के तौर पर इस्तेमाल करना गलत है और यह संधि पुरानी हो चुकी है।

उन्होंने जोर देकर कहा, “सिंधु जल संधि पर हमारी राय सबको पता है। यह बात समझ से बाहर है कि जो देश नीति के तौर पर आतंक को एक्सपोर्ट करता है, वह गुडविल और दोस्ती पर आधारित सहयोग के खास अधिकारों की मांग करता रहे।

यह भी स्पष्ट है कि संधि अब पुरानी हो चुकी है। कोई भी तकनीकी प्रबंधन समय के साथ रुका नहीं रह सकता, जबकि उसके आस-पास की दुनिया बदल रही हो। 1960 में हुई संधि को हमेशा का हक नहीं माना जा सकता, जो जवाबदेही से अलग हो, आज की हकीकत से अलग हो और पिछले छह दशकों के बड़े बदलावों से अछूती हो।”

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