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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:30 · नई दिल्ली संस्करण

भारत का पहला 'रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स' लॉन्च, आईआईएम मुंबई और जेएनयू की अहम भूमिका, 154 देशों का करेगा आकलन

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
भारत का पहला 'रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स' लॉन्च, आईआईएम मुंबई और जेएनयू की अहम भूमिका, 154 देशों का करेगा आकलन

नई दिल्ली। भारत में पहली बार एक ऐसा वैश्विक स्तर का इंडेक्स लॉन्च किया गया है, जो किसी देश की प्रगति को केवल जीडीपी या आर्थिक आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी जवाबदेही, नैतिक शासन, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और नागरिकों की भलाई के आधार पर मापेगा। इसका नाम 'जिम्मेदार राष्ट्र सूचकांक (रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स-आरएनआई)' है, जिसे देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की उपस्थिति में लॉन्च किया गया।

इस इंडेक्स के लिए आईआईएम मुंबई, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (डीएआईसी) ने वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन (डब्ल्यूआईएफ) के साथ मिलकर काम करने की घोषणा की है। इसका मकसद देशों की जिम्मेदारी, नैतिक शासन और लंबे समय की सोच को सामने लाना है। यह साझेदारी वैश्विक स्तर पर जिम्मेदार राष्ट्रों के मूल्यांकन की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

इस पहल के जरिए यह बताया गया कि आज के जटिल वैश्विक माहौल में किसी देश की मजबूती केवल उसकी आर्थिक ताकत से नहीं, बल्कि उसकी जवाबदेही, दीर्घकालिक सोच, नैतिक मूल्यों और पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता से तय होती है। साथ ही, देशों के बीच आपसी सीख और सहयोग की आवश्यकता को भी रेखांकित किया गया।

रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स में दुनिया के 154 देशों का आकलन किया जाएगा। यह आकलन पारंपरिक आर्थिक आंकड़ों से अलग और ज्यादा पारदर्शी तरीके से किया जाएगा, जिससे बेहतर नीतियां बनाने, देशों के बीच सकारात्मक बातचीत और लोगों की जीवन गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सके।

इस मौके पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि यह इंडेक्स केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह समझने का जरिया है कि कोई देश देश अपने नागरिकों और मानवता के साथ कैसा व्यवहार कर रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि नैतिकता का विचार भारतीय संस्कृति में पहले से ही गहराई से जुड़ा हुआ है।

सभा को संबोधित करते हुए वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन के संस्थापक एवं सचिव सुधांशु मित्तल ने कहा कि आरएनआई शक्ति-केंद्रित मापदंडों से हटकर उत्तरदायित्व-केंद्रित मूल्यांकन की दिशा में एक प्रतिमान बदलाव (पैराडाइम शिफ्ट) का प्रतिनिधित्व करता है, जो शासन के परिणामों को नैतिक और मानवीय मूल्यों के साथ जोड़ता है।

आईआईएम मुंबई के निदेशक प्रोफेसर मनोज तिवारी ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि ऐसे मूल्यों को आगे बढ़ाना भी है, जो समाज को बेहतर बनाएं। उन्होंने कहा कि हमें यह देखना जरूरी है कि हम सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी जिम्मेदार हों।

वहीं, जेएनयू की कुलपति शांतिश्री पंडित ने कहा कि आज के अनिश्चित समय में किसी देश की ताकत सिर्फ शक्ति से नहीं, बल्कि उसकी जिम्मेदारी से आती है।

यह इंडेक्स तीन मुख्य आधारों पर तैयार किया गया है।

पहला, आंतरिक जिम्मेदारी, जिसमें नागरिकों की गरिमा और भलाई देखी जाती है। दूसरा, पर्यावरणीय जिम्मेदारी, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और जलवायु बदलाव पर काम को आंका जाता है। तीसरा, बाहरी जिम्मेदारी, जिसमें शांति और वैश्विक सहयोग में देश के योगदान को मापा जाता है। यह मानव-केंद्रित दृष्टिकोण ऐसे समय में उम्मीद जगाता है, जब वैश्विक सुधारों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

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