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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:18 · नई दिल्ली संस्करण

भारतीय टेक इंडस्ट्री अमेरिका में स्थानीय कौशल विकास और भर्ती को देगी बढ़ावा : नैसकॉम

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन

नई दिल्ली। भारत में टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के लिए शीर्ष निकाय नैसकॉम ने सोमवार को कहा कि भारतीय आईटी और टेक इंडस्ट्री अमेरिका में लोकल अपस्किलिंग और हायरिंग पर 1 बिलियन डॉलर से भी अधिक खर्च कर रही है और इसी के साथ अमेरिका में स्थानीय लोगों की भर्ती की संख्या में वृद्धि हुई है।

पिछले कुछ वर्षों से अमेरिका में काम करने वाली भारतीय और भारत से जुड़ी कंपनियों ने एच-1बी वीजा पर अपनी निर्भरता को कम किया है और लोकल हायरिंग को बढ़ाया है।

नैसकॉम के अनुसार, "इसके अलावा, 2026 से फीस लागू होने से कंपनियों को अमेरिका में स्किलिंग प्रोग्राम को बेहतर बनाने और लोकल हायरिंग बढ़ाने का समय मिलेगा।"

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रमुख भारतीय और भारत से जुड़ी कंपनियों को 2015 में कुल 14,792 एच-1बी वीजा जारी किए गए थे, जो कि 2024 में घटकर मात्र 10,162 रह गए हैं।

नैसकॉम ने एक बयान में कहा, "टॉप 10 भारतीय और भारत से जुड़ी कंपनियों में एच-1बी कर्मचारी उनके कुल कर्मचारियों का 1 प्रतिशत से भी कम हैं।

इस ट्रेंड को देखते हुए हमें लगता है कि इस सेक्टर पर बहुत कम असर होगा।"

एच-1बी एक हाई-स्किल्ड वर्कर मोबिलिटी और नॉन-इमिग्रेंट वीजा है, जो अमेरिका में जरूरी स्किल गैप को पूरा करता है, जिसमें कर्मचारी को सैलरी लोकल कर्मचारियों के बराबर ही दी जाती है। साथ ही, एच-1बी कर्मचारी अमेरिका की कुल वर्कफोर्स का एक छोटा सा हिस्सा हैं।

इंडस्ट्री बॉडी ने कहा, "नासकॉम हमेशा से स्किल वाले लोगों की आवाजाही के लिए भरोसेमंद और स्थिर फ्रेमवर्क की वकालत करता रहा है, जो देश की प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता बनाए रखने के लिए जरूरी है और इसने हमेशा अमेरिका में इनोवेशन और आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया है।"

इसमें आगे कहा गया कि स्किल वाले लोगों की आवाजाही से कंपनियों को भविष्य के लिए निवेश के फैसले लेने, रिसर्च को तेज करने और ग्लोबल इनोवेशन इकोनॉमी में देश की स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

20 सितंबर को व्हाइट हाउस ने एच-1बी वीजा आवेदन पर 1 लाख डॉलर की सालाना फीस लगाने पर सफाई दी।

स्पष्ट किया गया है कि यह नियम मौजूदा वीजा होल्डर्स पर लागू नहीं होगा और केवल नए आवेदनों पर एक बार ही लागू होगा। इससे एलिजिबिलिटी और टाइमलाइन से जुड़ी उलझन दूर हुई है। साथ ही, अमेरिका के बाहर मौजूद एच-1बी होल्डर्स के लिए बिजनेस की निरंतरता और अनिश्चितता की चिंता भी कम हुई है।

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