अमेठी के कोरवा में बना भारत का नया सुरक्षा प्रहरी: AK-203 राइफल "आत्मनिर्भर भारत" की दिशा में बड़ी छलांग

अमेठी के कोरवा में बना भारत का नया सुरक्षा प्रहरी: AK-203 राइफल "आत्मनिर्भर भारत" की दिशा में बड़ी छलांग
कोरवा (अमेठी), उत्तर प्रदेश | 21 जुलाई 2025
भारत की आत्मनिर्भरता की ओर एक और मजबूत कदम उठाते हुए, स्वदेश में निर्मित अत्याधुनिक AK-203 राइफल को समय से 22 महीने पहले तैयार कर लिया गया है। यह परियोजना "इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL)" के तहत कोरवा, अमेठी स्थित संयंत्र में पूरी तरह भारतीय तकनीकी और श्रमबल से विकसित की जा रही है। अब इसे भारतीय सेना में INSAS राइफल की जगह तैनात किया जाएगा।
₹5,200 करोड़ की इस परियोजना के अंतर्गत कुल 6.01 लाख AK-203 राइफल्स का उत्पादन किया जाएगा। भारत और रूस के इस संयुक्त उपक्रम में भारत की हिस्सेदारी 50.5% है जबकि रूस की 49.5%। गौरतलब है कि रूस ने इस परियोजना में 100% तकनीकी हस्तांतरण (ToT) किया है, जिससे भारत को यह तकनीक पूर्ण रूप से हस्तांतरित हो चुकी है।
AK-203 राइफल को "ब्रह्मोस का छोटा भाई" कहा जा रहा है और इसका लक्ष्य 2032 तक भारत को दुनिया के शीर्ष 5 छोटे हथियार निर्माताओं में शामिल करना है। भारत इन हथियारों को 2030 तक मित्र देशों को निर्यात करने की योजना पर काम कर रहा है।
राइफल का निर्माण कार्य 22 महीने पहले दिसंबर 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि इसकी मूल समयसीमा अक्टूबर 2032 थी। उत्पादन क्षमता 2026 के बाद 600 राइफल प्रति दिन तक पहुंचाने की योजना है, जिसमें 100% स्थानीयकरण दिसंबर 2025 तक हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। राइफल के 60 घटक स्थानीय रूप से प्राप्त किए जा रहे हैं, और इसमें कुल 180 सब-पार्ट्स व 120 सटीक निर्माण प्रक्रियाएं शामिल हैं।
AK-203 राइफल की विशेषताओं में इसकी 15,000 राउंड तक की जीवन क्षमता, बेहतर विश्वसनीयता, और उच्च सटीकता शामिल है। इसका प्राथमिक उपयोग सीमा क्षेत्रों, विशेष रूप से LoC और LAC पर तैनात अग्रिम पंक्ति के जवानों द्वारा किया जाएगा। परियोजना में 90% कार्यबल स्थानीय युवाओं से लिया गया है, जिससे क्षेत्रीय रोजगार को भी बढ़ावा मिला है।
"कोरवा में जन्मी, भारत की सुरक्षा के लिए बनी" – यह संदेश आज न केवल भारत की सैन्य मजबूती का प्रतीक है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "आत्मनिर्भर भारत" विज़न की दिशा में एक ठोस उपलब्धि भी है।
AK-203 अब न सिर्फ राइफल है, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति का प्रतीक बन चुकी है।





