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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 9:35 · नई दिल्ली संस्करण

भारत-जापान का साथ निवेश, स्टार्टअप साझेदारी और कुशल पेशेवरों के लिए नए रास्ते खोलेगा : पीएम मोदी

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
भारत-जापान का साथ निवेश, स्टार्टअप साझेदारी और कुशल पेशेवरों के लिए नए रास्ते खोलेगा : पीएम मोदी

टोक्यो। प्रधानमंत्री ने शनिवार को जापान के गवर्नरों के साथ एक विशेष संवाद में भारत-जापान के ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करने और दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह मुलाकात उनके लिए खुशी का मौका है, क्योंकि जापान के राज्यपाल उनकी क्षेत्रों की विविधता और ऊर्जा के जीवंत प्रतीक हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, "मैं अनुभव कर रहा हूं कि इस कमरे में सैतामा की रफ्तार है, मियागी की मजबूती है, फुकुओका की जीवंतता है और नारा की विरासत की खुशबु है। आप सभी में कु‍मामोतो की गर्मजोशी है, नागानो की ताजगी है, शिज़ुओका की सुंदरता है, और नागासाकी की धड़कन है। आप सभी, माउंटी फूजी की ताकत है और साकुरा की आत्मा के प्रतीक हैं, जो जापान को टाइमलेस बनाते हैं। भारत और जापान का रिश्ता हजारों साल पुराना है, जो भगवान बुद्ध की करुणा और राधाबिनोद पाल जैसे नायकों के साहस से जुड़ा है।”

उन्होंने अपने गृह राज्य गुजरात का उदाहरण देते हुए बताया कि बीती सदी में गुजराती हीरे के व्यापारी कोबे आए थे, जबकि हमा-मात्सु की कंपनियों ने भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र में क्रांति लाई। यह उद्यमशीलता दोनों देशों को जोड़ती है। आज ट्रेड, टेक्नोलॉजी, पर्यटन, सुरक्षा, स्किल और संस्कृति के क्षेत्र में नए अध्याय लिखे जा रहे हैं, जो केवल टोक्यो या दिल्ली तक सीमित नहीं, बल्कि राज्यों और प्रांतों की सोच में जीवंत हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने 15 साल के गुजरात मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने नीति-आधारित शासन, उद्योग को बढ़ावा, मजबूत बुनियादी ढांचा और निवेश के लिए माहौल बनाने पर ध्यान दिया, जो आज "गुजरात मॉडल" के नाम से जाना जाता है। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने इस सोच को राष्ट्रीय नीति में शामिल किया। राज्यों में प्रतिस्पर्धा की भावना जगाई और उन्हें राष्ट्रीय विकास का मंच बनाया। जापान के प्रांतों की तरह भारत के हर राज्य की अपनी पहचान है, कहीं समुद्र तट, कहीं पहाड़। इस विविधता को लाभ में बदलने के लिए 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' अभियान, आकांक्षी जिले-ब्लॉक कार्यक्रम, और दूरदराज गांवों को मुख्यधारा में लाने के लिए 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' शुरू किया गया, जो अब विकास के केंद्र बन रहे हैं।

उन्होंने जापान के राज्यपालों की जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनके प्रांत टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और नवाचार के केंद्र हैं, कई की अर्थव्यवस्था कई देशों से बड़ी है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग का भविष्य उनके हाथों में है। पहले से चली आ रही साझेदारियों गुजरात-शिजुओका, उत्तर प्रदेश-यमानाशी, महाराष्ट्र-वकायामा, आंध्र प्रदेश-तोयामा को उन्होंने कागज से निकालकर लोगों और समृद्धि तक ले जाने की बात कही।

प्रधानमंत्री इशिबा के साथ लॉन्च की गई 'स्टेट-प्रांत साझेदारी पहल' के तहत हर साल तीन भारतीय राज्य और तीन जापानी प्रांतों के प्रतिनिधिमंडल एक-दूसरे का दौरा करेंगे। उन्होंने राज्यपालों को भारत आने का निमंत्रण दिया और साझा प्रगति के लिए सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि जापान और भारत के छोटे शहरों के स्टार्टअप्स और एमएसएमई मिलकर विचारों का आदान-प्रदान, नवाचार, और अवसर पैदा कर सकते हैं। इसी सोच के साथ कानसाई में बिजनेस एक्सचेंज फोरम शुरू हो रहा है, जो निवेश, स्टार्टअप साझेदारी और कुशल पेशेवरों के लिए नए रास्ते खोलेगा।

प्रधानमंत्री ने युवाओं के कनेक्शन पर जोर देते हुए कहा कि जापान की विश्व प्रसिद्ध यूनिवर्सिटीज में भारतीय छात्रों को लाने और अगले पांच साल में पांच लाख लोगों के आदान-प्रदान के लिए एक एक्शन प्लान लॉन्च किया गया है। साथ ही, 50,000 भारतीय कुशल पेशेवरों को जापान भेजने की योजना है, जिसमें प्रांतों की अहम भूमिका होगी।

उन्होंने आशा जताई कि टोक्यो और दिल्ली नेतृत्व करेंगे और कानागावा-कर्नाटक, आइची-असम, और ओकायामा-ओडिशा मिलकर नई इंडस्ट्री, स्किल, और अवसर बनाएंगे।

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