Sahil Wakode Death: IIT Bombay छात्र ने मौत से पहले महिला मित्र को आखिरी कॉल में कहा - 'मुझसे गलती हो गई, पेपर...'

IIT-बॉम्बे के 22 साल के छात्र साहिल वाकोडे की मौत मामले में जांच का सबसे अहम सुराग उसकी आखिरी फोन कॉल बन गई है। क्राइम ब्रांच को पता चला है कि 18 सितंबर को फांसी लगाने से कुछ घंटे पहले साहिल ने अपनी एक महिला मित्र को फोन किया था। दोपहर करीब 2:30 बजे हुई ये बातचीत ही उसकी आखिरी बातचीत मानी जा रही है, क्योंकि इसके बाद उसने किसी का फोन नहीं उठाया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक कॉल पर साहिल बेहद तनाव में था। उसने दोस्त से कहा, "मुझसे गलती हो गई। मेरा थर्मोडायनामिक्स का पेपर भी अच्छा नहीं गया था और अब ये हो गया।" दोस्त ने उसे शांत रहने और अगले पेपर पर फोकस करने को कहा।
जांच में सामने आया है कि मौत वाले दिन सुबह सेमेस्टर परीक्षा में साहिल को मोबाइल पर ChatGPT इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था। आरोप है कि उसने प्रश्नपत्र को ChatGPT पर अपलोड कर जवाब निकालने की कोशिश की थी। IIT प्रशासन का कहना है कि उस वक्त उसके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी, लेकिन साहिल को डर था कि उसका करियर खराब हो जाएगा। वह दोपहर 1:30 बजे हॉस्टल लौटा और कमरे से बाहर नहीं निकला। इस केस में नया मोड़ ये है कि पुलिस का दावा है कि 2:30 बजे वाली आखिरी कॉल में साहिल ने जाति या जातिगत टिप्पणी का कोई जिक्र नहीं किया। दोस्त के बयान में भी ऐसा कुछ नहीं आया है।
लेकिन यहीं जांच उलझती है। साहिल के परिवार ने IIT के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला पर जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि साहिल ने पहले माता-पिता को भी जातिसूचक टिप्पणियों की शिकायत की थी। इसलिए पुलिस इस एक कॉल के आधार पर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच रही। क्राइम ब्रांच ने अब तक 5 लोगों के बयान दर्ज किए हैं। परीक्षा हॉल की CCTV फुटेज खंगाली जा रही है। साहिल का लॉक्ड iPhone फोरेंसिक लैब भेजा गया है। पुलिस को उम्मीद है कि उसके WhatsApp चैट, फोटो और डॉक्यूमेंट से उसकी मानसिक स्थिति का पता चलेगा।
इधर खबर सुनते ही जिस महिला मित्र से साहिल ने बात की थी, उसे पैनिक अटैक आ गया, उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। संस्थान ने निष्पक्ष जांच के लिए 10 सदस्यीय कमेटी बना दी है और परीक्षा के इनविजिलेटर रहे प्रोफेसर डूल्ला को छुट्टी पर भेज दिया गया है। साहिल एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में दूसरे साल का छात्र था। क्या उसकी मौत का कारण परीक्षा का प्रेशर था या सालों से झेला जा रहा भेदभाव, इसका जवाब अब फोरेंसिक रिपोर्ट और कमेटी की जांच ही देगी।
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