"मैं नहीं रोकता तो एक हफ्ते में परमाणु युद्ध छिड़ जाता..." – डोनाल्ड ट्रंप का नया दावा, भारत-पाक सीज़फायर का क्रेडिट भी खुद ले बैठे!

"मैं नहीं रोकता तो एक हफ्ते में परमाणु युद्ध छिड़ जाता..." – डोनाल्ड ट्रंप का नया दावा, भारत-पाक सीज़फायर का क्रेडिट भी खुद ले बैठे!
■ बिना बुलाए दुनिया के मामलों में टांग अड़ाने वाले ट्रंप का बेतुका बयान, कूटनीति पर सवाल नहीं, मज़ाक बना दिया!
वाशिंगटन/नई दिल्ली, व्यंगात्मक रिपोर्ट –
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी "मैं ही दुनिया हूं" वाली सोच का प्रदर्शन करते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच 2021 में हुए सीज़फायर समझौते का सारा श्रेय खुद को ही दे डाला। एक जनसभा में बोलते हुए ट्रंप ने कहा –
"अगर मैंने बीच में हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो भारत और पाकिस्तान के बीच एक हफ्ते में परमाणु युद्ध हो जाता।"
"मैंने दोनों देशों को शांत किया, और व्यापार के ज़रिए तनाव कम कराया।"
ट्रंप की यह टिप्पणी न केवल दुनिया भर के कूटनीतिक हलकों में हैरानी का विषय बनी, बल्कि भारत के अधिकारियों के लिए भी आश्चर्य और हास्य का कारण रही। असलियत यह है कि भारत और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों के बीच हुई सीधी द्विपक्षीय बातचीत के बाद यह सीज़फायर हुआ था, जिसमें अमेरिका की भूमिका नगण्य थी।
■ ट्रंप की आदत: जहां मामला न हो, वहां खुद को घुसाना ज़रूरी समझते हैं
डोनाल्ड ट्रंप का इतिहास रहा है कि वे बिना बुलावे की मध्यस्थता के शौकीन हैं। चाहे वो उत्तर कोरिया के साथ "बातचीत की ड्रामेबाज़ी" हो, अफगान शांति प्रक्रिया में खुद को श्रेय देना हो, या अब भारत-पाक सीमा का मामला – ट्रंप हर वैश्विक मसले में अपनी उपलब्धियों की काल्पनिक सूची जोड़ने लगते हैं।
एक नहीं कई कूटनीतिक विशेषज्ञों ( भारत से लेकर अमेरिका तक )ने कहा –
"ट्रंप को लगता है कि कैमरा चालू हो और दुनिया का कोई भी विवाद हो, तो उनका बयान देना अनिवार्य है। लेकिन इस तरह की बातों से गंभीर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का मज़ाक बनता है।"
■ “मैं ही दुनिया बचाने वाला हूं” – ट्रंप का पुराना नैरेटिव
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने दुनिया को बचाने का दावा किया हो। इससे पहले भी वे ईरान, अफगानिस्तान, चीन, यहां तक कि जलवायु संकट पर भी झूठे या बढ़ा-चढ़ा कर खुद को हीरो घोषित कर चुके हैं। उनकी शैली में तथ्यों की जगह प्रोपेगैंडा और आत्ममुग्धता अधिक होती है।
भारत-पाक सीमा पर सीज़फायर के दौरान भारत सरकार ने पूरी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण वार्ता और आंतरिक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा बताया था। पाकिस्तान की ओर से भी सैन्य कमांडरों के स्तर पर बातचीत की पुष्टि हुई थी, न कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की।
■ क्या हर समस्या का समाधान "ट्रंप" ही हैं?
ट्रंप के ताज़ा बयान पर सोशल मीडिया पर चुटकुलों की बाढ़ आ गई। एक यूज़र ने लिखा –
"अगली बार ट्रंप शायद कहेंगे कि उन्होंने ही अर्जुन को श्रीकृष्ण से गीता सुनवाई थी!"
एक अन्य ने ट्वीट किया –
"ट्रंप को नोबेल नहीं, नो-ब्रेन पुरस्कार मिलना चाहिए!"





