हिज्बुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन भगोड़ा घोषित, 30 अगस्त तक कोर्ट में पेश नहीं हुआ तो जब्त होगी संपत्ति — आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक कार्रवाई

हिज्बुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन भगोड़ा घोषित, 30 अगस्त तक कोर्ट में पेश नहीं हुआ तो जब्त होगी संपत्ति — आतंकवाद के खिलाफ भारत की निर्णायक कार्रवाई
श्रीनगर, 26 जुलाई 2025 — भारत सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपने जीरो टॉलरेंस के संकल्प को और मजबूत करते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। हिज्बुल मुजाहिदीन के कुख्यात सरगना और मोस्ट वांटेड आतंकी सैयद सलाहुद्दीन को श्रीनगर की एनआईए अदालत ने भगोड़ा घोषित कर दिया है। अदालत ने सख्त चेतावनी दी है कि अगर वह 30 अगस्त 2025 तक स्वयं को कोर्ट में पेश नहीं करता, तो उसकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। यह कार्रवाई गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की धाराओं के तहत की गई है।
देश का दुश्मन, घाटी का गुनहगार
सैयद सलाहुद्दीन न केवल भारत विरोधी साजिशों का मास्टरमाइंड है, बल्कि कश्मीर घाटी में हजारों मासूमों के खून का जिम्मेदार भी है। यह वही आतंकवादी है जिसने पाकिस्तान में बैठकर वर्षों तक भारत में आतंकवाद को हवा दी, युवाओं को बरगलाया, हथियारों की तस्करी करवाई और हवाला नेटवर्क के जरिए देश में टेरर फंडिंग को अंजाम दिया। सलाहुद्दीन लंबे समय से पाकिस्तान के संरक्षण में पल रहा है, जहाँ से वह भारत विरोधी जहरीली साजिशों को अंजाम देने की कोशिश कर रहा है।
एनआईए की जांच से खुली देशविरोधी करतूतें
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विस्तृत जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि सलाहुद्दीन न केवल हिज्बुल मुजाहिदीन का सरगना है, बल्कि कई अन्य इस्लामिक आतंकवादी संगठनों के साथ भी उसके प्रत्यक्ष संपर्क हैं। उसने घाटी में युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेल कर उन्हें बंदूक उठाने को मजबूर किया। वह न केवल भारत की शांति और अखंडता के लिए खतरा है, बल्कि मानवता का भी दुश्मन है।
सरकार का संदेश साफ — आतंक और उसके मददगारों को नहीं बख्शा जाएगा
सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की यह निर्णायक कार्रवाई केवल एक भगोड़े के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह उन सभी देशविरोधी तत्वों के लिए कड़ा संदेश है जो पाकिस्तान या अन्य विदेशी ताकतों के इशारे पर भारत की एकता को तोड़ने का सपना देखते हैं। आज भारत न केवल अपने नागरिकों की रक्षा करने में सक्षम है, बल्कि ऐसे आतंकियों और उनके आकाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब करने का सामर्थ्य भी रखता है।
आतंकवाद को मिल रहा है न्यायिक और कानूनी जवाब
सलाहुद्दीन जैसे आतंकियों को सजा दिलाना केवल कानून का पालन नहीं, बल्कि उन हजारों निर्दोष नागरिकों के खून के प्रति भारत की जिम्मेदारी है जो आतंकवाद के शिकार हुए। अदालत द्वारा उठाया गया यह कदम एक नई शुरुआत है — जहां आतंक के खिलाफ निर्णायक युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि कानूनी और आर्थिक माध्यमों से भी लड़ा जाएगा।





