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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:21 · नई दिल्ली संस्करण

सरगुजा में 13 हाथियों के दल का डेरा, चकेरी में फसलों को नुकसान, वन विभाग ने जारी किया अलर्ट

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
सरगुजा में 13 हाथियों के दल का डेरा, चकेरी में फसलों को नुकसान, वन विभाग ने जारी किया अलर्ट

अंबिकापुर। सरगुजा जिले के वन परिक्षेत्र उदयपुर के तहत आने वाले बासेन सर्किल में हाथियों की धमक से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। सरमा बीट क्षेत्र में पिछले कुछ समय से 13 हाथियों का एक दल लगातार विचरण कर रहा है।वन विभाग से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मंगलवार को हाथियों का यह दल चकेरी बीट के कक्ष क्रमांक 2056 से होते हुए सरमा बीट के पीएफ 2061 क्षेत्र में दाखिल हुआ है, जहां वर्तमान में दल ने अपना डेरा जमाया हुआ है। वन्यप्राणियों की इस आमद के बाद से ही वन अमला पूरी तरह मुस्तैद हो गया है।हाथियों के इस दल ने चकेरी गांव में प्रवेश कर खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर नुकसान का विस्तृत आकलन करने में जुट गई है। प्रारंभिक सर्वे के अनुसार, क्षेत्र के कम से कम 4 कृषकों की फसलें इस दल की चपेट में आकर बर्बाद हुई हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस दौरान किसी भी प्रकार की जनहानि, मकान क्षति या मवेशियों के हताहत होने की कोई अप्रिय सूचना नहीं मिली है, जिससे प्रशासन ने राहत की सांस ली है।वन विभाग के विशेषज्ञों द्वारा इस दल की पहचान “कोरबा एचई2” कोड नाम से की गई है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस कुनबे में कुल 13 हाथी शामिल हैं, जिनमें एक नर हाथी, छह मादा हथिनी और छह नन्हे शावक मौजूद हैं। शावकों की बड़ी संख्या होने के कारण यह दल सुरक्षात्मक रूप से अधिक संवेदनशील और आक्रामक हो सकता है, यही वजह है कि वन विभाग इस दल की हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रहा है। दल प्रभारी के रूप में परिक्षेत्र सहायक बासेन सहित पूरा स्टाॅफ लगातार क्षेत्र में मुस्तैद है।सुरक्षा के लिहाज से वन विभाग ने चकेरी, बासेन, परसा, सनिबर्रा और सरमा सहित आसपास के तमाम सीमावर्ती गांवों को संभावित प्रभावित क्षेत्र घोषित कर दिया है। वन अमले द्वारा ग्रामीण इलाकों में लगातार मुनादी कराई जा रही है और लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी जा रही है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे फिलहाल जंगल की ओर जाने से पूरी तरह बचें। साथ ही मवेशी चराने, जलाऊ लकड़ी और तेंदूपत्ता संग्रहण जैसे दैनिक कार्यों के लिए जंगलों का रुख न करने की सख्त सलाह दी गई है ताकि किसी भी तरह के मैन-एनिमल कॉन्फ्लिक्ट (मानव-हाथी द्वंद्व) को रोका जा सके।

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