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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:36 · नई दिल्ली संस्करण

हरदोई में सपा नेता के बिगड़े बोल: जातिसूचक टिप्पणी पर बवाल, BJP नेत्री बोलीं- ये दलित समाज का अपमान

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
हरदोई में सपा नेता के बिगड़े बोल: जातिसूचक टिप्पणी पर बवाल, BJP नेत्री बोलीं- ये दलित समाज का अपमान

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में सियासी बयानबाजी ने तूल पकड़ लिया है। समाजवादी पार्टी के एक स्थानीय नेता द्वारा भारतीय जनता पार्टी की एक दलित महिला नेत्री पर की गई जातिसूचक टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस टिप्पणी के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है और सपा नेता के खिलाफ SC-ST एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग उठ रही है। जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला हरदोई में एक जनसभा के दौरान का है। मंच से बोलते हुए सपा नेता ने बीजेपी की अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाली एक महिला नेत्री का नाम लेकर कहा कि अगर बीजेपी में न होतीं तो किसी घाट पर कपड़े धो रही होतीं। जैसे ही यह बयान सामने आया, सियासी पारा चढ़ गया।

बताया जा रहा है कि हरदोई में सपा द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में पार्टी के जिला स्तर के नेता ने मंच से बीजेपी नेत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "इनकी औकात क्या है, अगर बीजेपी में न होतीं तो किसी घाट पर कपड़े धो रही होतीं।" इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने तालियां भी बजाईं। किसी ने इस पूरे भाषण का वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया पर डाल दिया। देखते ही देखते वीडियो वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद बीजेपी महिला मोर्चा ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। बीजेपी नेत्री ने खुद सामने आकर कहा है कि यह सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि पूरे दलित समाज का अपमान है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की मानसिकता हमेशा से दलित विरोधी रही है और यह बयान उसी का सबूत है।

बीजेपी नेत्री ने कहा, "मैं एक दलित समाज से आती हूं और मेहनत करके इस मुकाम तक पहुंची हूं। सपा नेता ने मेरे समाज की महिलाओं का अपमान किया है। घाट पर कपड़े धोना कोई छोटा काम नहीं है, लेकिन जिस लहजे में उन्होंने यह बात कही है, वह उनकी जातिवादी सोच को दिखाता है।" इस घटना के बाद हरदोई बीजेपी इकाई ने कोतवाली में तहरीर दी है। बीजेपी जिलाध्यक्ष ने कहा है कि सपा नेता ने सार्वजनिक मंच से जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर अपमानित किया है, इसलिए उनके खिलाफ SC-ST एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होना चाहिए। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर 24 घंटे के अंदर FIR दर्ज नहीं हुई तो वे सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे। वहीं, अनुसूचित जाति के कई संगठनों ने भी इस बयान की निंदा की है और कार्रवाई की मांग की है।

कानूनी जानकारों के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक तौर पर किसी अनुसूचित जाति या जनजाति के व्यक्ति को उसकी जाति के नाम पर अपमानित करता है, तो उस पर SC-ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत मामला बनता है। इस मामले में भी सपा नेता ने मंच से दलित नेत्री की जाति को लेकर टिप्पणी की है, जो इस एक्ट के दायरे में आ सकती है। इसमें 6 महीने से लेकर 5 साल तक की सजा का प्रावधान है। विवाद बढ़ता देख समाजवादी पार्टी ने इस बयान से किनारा कर लिया है।

सपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह नेता का निजी बयान है, पार्टी ऐसी किसी टिप्पणी का समर्थन नहीं करती। वहीं, सपा नेता ने अपनी सफाई में कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। फिलहाल, हरदोई पुलिस ने कहा है कि वायरल वीडियो की जांच की जा रही है और तहरीर के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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