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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:03 · नई दिल्ली संस्करण

ग्रेटर नोएडा-दिल्ली चलती बस गैंगरेप मामला, रियलिटी चेक में सामने आई बस सुरक्षा की डरावनी तस्वीर

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
ग्रेटर नोएडा-दिल्ली चलती बस गैंगरेप मामला, रियलिटी चेक में सामने आई बस सुरक्षा की डरावनी तस्वीर

ग्रेटर नोएडा के परी चौक से दिल्ली के कश्मीरी गेट के बीच चलती स्लीपर बस में नाबालिग लड़की के साथ हुई खौफनाक वारदात ने सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 4 अगस्त को घटी इस दर्दनाक घटना के बाद मीडिया द्वारा दिल्ली में संचालित स्लीपर बसों का 'रियलिटी चेक' किया गया। इस जांच के दौरान सरकारी सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ती हुई पाई गईं, जो किसी भी यात्री की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाली हैं। रियलिटी चेक के दौरान बस के अंदर सुरक्षा से जुड़ी कई गंभीर कमियां उजागर हुईं:

नियमों के मुताबिक ड्राइवर की सीट और यात्री केबिन के बीच कोई अपारदर्शी पार्टिशन नहीं होना चाहिए ताकि अंदर की गतिविधियों पर सीधी नजर रखी जा सके, लेकिन बस में एक बड़ा और मजबूत पार्टिशन लगा पाया गया। बस के भीतर कम से कम तीन सीसीटीवी कैमरे होना अनिवार्य है, लेकिन रियलिटी चेक में एक भी कैमरा नहीं मिला। आपात स्थिति में मदद के लिए यात्रियों की सीटों के पास पैनिक या SOS बटन की सुविधा होनी चाहिए, जिसका बस में पूरी तरह अभाव था। कम से कम चार इमरजेंसी एग्जिट गेट के नियम के विपरीत बस में केवल दो कांच तोड़ने वाली खिड़कियां पाई गईं। रात के सफर में बस के भीतर की गतिविधियों को बाहर से दृश्यमान रखने के लिए पर्दे खुले रखने का नियम है, परंतु बस के पर्दे पूरी तरह बंद थे।

पूछताछ में बस ड्राइवर ने आरोप लगाया कि पुलिस पिकेट पर चेकिंग के दौरान सुरक्षा मानकों या पैनिक बटन की जांच करने के बजाय अन्य बातों को लेकर अवैध वसूली की जाती है। यह पूरी जांच ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के बीच घटी उस दर्दनाक वारदात की पृष्ठभूमि में हुई, जहां उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की 11वीं की छात्रा के साथ चलती बस में करीब डेढ़ घंटे तक दरिंदगी की गई। छात्रा अपने परिजनों से विवाद के बाद नोएडा स्थित रिश्तेदार के घर आ रही थी। परी चौक पर उतरने के बाद बस कंडक्टर और उसके साथियों संदीप और कुलदीप ने उसके साथ बदसलूकी की और जबरन बस में बैठाकर गैंगरेप किया।

ग्रेटर नोएडा और नोएडा से गुजरते हुए दिल्ली के कश्मीरी गेट तक के लगभग 47 किलोमीटर लंबे सफर के दौरान किसी भी पुलिस प्वाइंट पर बस की चेकिंग नहीं हुई। बाद में पीड़िता को कश्मीरी गेट के पास उतारकर आरोपी फरार हो गए। पीड़िता ने कश्मीरी गेट थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इस खौफनाक घटना ने 2012 के बहुचर्चित निर्भया कांड की यादें ताजा कर दी हैं, जिसके बाद सार्वजनिक परिवहन को सुरक्षित बनाने के लिए कई कड़े नियम लागू किए गए थे। हालांकि, 14 साल बाद भी चलती बस में नाबालिग से गैंगरेप और रियलिटी चेक में सामने आई लापरवाही यह साबित करती है कि कागजी नियम और जमीनी हकीकत में आज भी बड़ा अंतर मौजूद है।

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