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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 9:54 · नई दिल्ली संस्करण

सरकार सख्त: भारत में डिजाइन करने वाली कंपनियों को ही मिलेगा फायदा अश्विनी वैष्णव

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
सरकार सख्त: भारत में डिजाइन करने वाली कंपनियों को ही मिलेगा फायदा अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को साफ कर दिया कि इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) में शामिल कंपनियों को सरकारी सहायता तभी मिलेगी, जब वे भारत में प्रोडक्ट डिजाइन पर गंभीरता से निवेश करेंगी।

राष्ट्रीय राजधानी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रोत्साहन और समर्थन अब इस बात से जुड़े होंगे कि कंपनियां देश में डिजाइन, क्वालिटी और इंजीनियरिंग क्षमताओं को कितना विकसित कर रही हैं।

मंत्री ने चेतावनी दी कि अगर कंपनियां सरकार की चार प्रमुख मांगों पर काम नहीं करती हैं, तो वह अगली इंडस्ट्री मीटिंग में शामिल भी नहीं होंगी।

वैष्णव ने कहा कि कंपनियों द्वारा डिजाइन और क्वालिटी क्षमताओं को विकसित करने की गति से वे निराश हैं, और अगर सुधार नहीं हुआ तो सरकार कड़े फैसले लेने को तैयार है।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "अगर इंडस्ट्री हमारी अपेक्षाओं के मुताबिक कदम नहीं उठाती है, तो हम आगे की मंजूरी और फंडिंग रोक सकते हैं।"

सरकार की अपेक्षाओं को बताते हुए मंत्री ने कहा कि कंपनियों को केवल असेंबली या बेसिक मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें कॉन्सेप्चुअल डिजाइन, इंजीनियरिंग डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग डिजाइन तक अपनी क्षमता बढ़ानी होगी।

मंत्री ने यह भी कहा कि जिन प्रोजेक्ट्स को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है, उनमें भी अगर शर्तें पूरी नहीं हुईं, तो फंड जारी नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा, "जिन आवेदनों को मंजूरी दी जा चुकी है, उनमें भी हम पैसा नहीं देंगे अगर हमारी शर्तें पूरी नहीं हुईं।"

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने इस स्कीम के चौथे चरण में 29 आवेदनों को मंजूरी दी है, जिनमें कुल 7,104 करोड़ रुपए का निवेश शामिल है। ईसीएमएस के तहत कुल 59,350 करोड़ रुपए के निवेश का लक्ष्य था, जबकि अब तक 61,671 करोड़ रुपए के प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है।

वैष्णव ने कहा कि असली वैल्यू तभी बनती है, जब डिजाइन भारत में किया जाता है। उन्होंने बताया कि मैन्युफैक्चरिंग जरूरी है, लेकिन डिजाइन का महत्व उससे ज्यादा है क्योंकि यह ज्यादा जटिल और रणनीतिक प्रक्रिया है।

वैश्विक गुणवत्ता मानकों की आवश्यकता पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि ग्लोबल स्तर की क्वालिटी के लिए सिक्स सिग्मा जैसी प्रक्रियाएं जरूरी हैं। उन्होंने कहा, "यह होना ही चाहिए; इसके बिना प्रोडक्ट पूरा नहीं माना जाएगा।

" उन्होंने विश्वसनीयता, सटीकता और निरंतरता पर सरकार के फोकस को रेखांकित किया।

मंत्री ने इंडस्ट्री से यह भी अपील की कि वे स्किल्ड मैनपावर तैयार करने पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि सरकार पूरे इकोसिस्टम को सपोर्ट करेगी, लेकिन कंपनियों को खुद आगे आकर डिजाइन और इंजीनियरिंग में कुशल प्रतिभा तैयार करनी होगी।

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