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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:19 · नई दिल्ली संस्करण

वित्त मंत्री सीतारमण ने सेबी से KYC प्रक्रिया सरल और एकसमान बनाने को कहा

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
वित्त मंत्री सीतारमण ने सेबी से KYC प्रक्रिया सरल और एकसमान बनाने को कहा

मुंबई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को केवाईसी (नो योर कस्टमर) प्रक्रिया में बड़े बदलाव की जरूरत बताई। उन्होंने सेबी यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (एसईबीआई) से पूरे वित्तीय सिस्टम में केवाईसी को आसान और एक समान बनाने की दिशा में कदम उठाने का आग्रह किया।

सेबी के 38वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि एक ऐसा केवाईसी सिस्टम होना चाहिए जो सरल, सुरक्षित और हर प्लेटफॉर्म पर काम करने वाला हो।

उन्होंने कहा कि अभी का सिस्टम लोगों के लिए परेशानी पैदा करता है, क्योंकि उन्हें बार-बार अलग-अलग जगह पर वही दस्तावेज और जानकारी देनी पड़ती है।

वित्त मंत्री ने इस काम को जल्दी करने पर जोर देते हुए कहा कि फाइनेंशियल स्टेबिलिटी एंड डेवलपमेंट काउंसिल और अन्य नियामकों के साथ मिलकर एक साझा सिस्टम तैयार किया जाए।

उन्होंने साफ कहा कि किसी भी नागरिक को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर बार-बार केवाईसी नहीं करनी चाहिए।

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि तेजी से बदलते वित्तीय बाजार को देखते हुए नियमों में बदलाव जरूरी है।

उन्होंने कहा कि अब रेगुलेशन को केवल समस्या आने के बाद नहीं, बल्कि पहले से ही संभावित जोखिमों को ध्यान में रखकर बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए होने वाले गलत इस्तेमाल, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय धोखाधड़ी और बढ़ते साइबर खतरों को बड़ी चुनौती बताया।

वित्त मंत्री ने कहा कि आगे चलकर नियम बहुत ज्यादा सख्त और जटिल होने के बजाय सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए, ताकि नवाचार को बढ़ावा मिले और निवेशकों के हित भी सुरक्षित रहें।

उन्होंने सुझाव दिया कि नए नियम बनाते समय जनता से राय ली जाए, जिससे संतुलित और लचीले नियम तैयार किए जा सकें।

इससे पहले इसी महीने वित्त मंत्री ने कहा था कि भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और अच्छा विदेशी मुद्रा भंडार भारतीय रिजर्व बैंक को नीतियों में ज्यादा लचीलापन देता है।

उन्होंने 6 अप्रैल को राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत के पास सरकारी खर्च (कैपेक्स) जारी रखने, ब्याज दरों में कटौती करने और प्रभावित क्षेत्रों को सहायता देने की पर्याप्त क्षमता है, जो पिछले दस वर्षों की वित्तीय अनुशासन का परिणाम है।

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