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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:42 · नई दिल्ली संस्करण

12 फरवरी का पंचांग : फाल्गुन कृष्ण की दशमी तिथि, जानें शुभ-अशुभ समय

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
12 फरवरी का पंचांग : फाल्गुन कृष्ण की दशमी तिथि, जानें शुभ-अशुभ समय

नई दिल्ली। सनातन धर्म में पंचांग के पांच अंग तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार का बहुत महत्व है। ये तत्व व्यक्ति के रोजाना के कार्य, पूजा-पाठ और शुभ कार्य की शुरुआत के लिए महत्व रखते हैं। 12 फरवरी को गुरुवार है, जो भगवान नारायण, माता पितांबरा (बगलामुखी) और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है।

गुरुवार की विशेष पूजा और बृहस्पति मंत्र जप से ज्ञान, समृद्धि और बुद्धि में वृद्धि होती है और जिंदगी में शुभता आती है। यह दिन नारायण और देवगुरु बृहस्पति के साथ ही विजय की देवी माता पितांबरा को भी समर्पित है। विधि-विधान से की गई पूजा से जिंदगी के हर क्षेत्र में विजय मिलती है और शत्रुओं का नाश होता है। वहीं, नारायण के साथ बृहस्पति देव की आराधना, पीली वस्तु दान और केले का प्रसाद चढ़ाना शुभ फलदायी माना गया है।

दृक पंचांग के अनुसार 12 फरवरी को सूर्योदय 7 बजकर 2 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 9 मिनट पर होगा। तिथि कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक है, उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन रहेगा। उसके बाद एकादशी शुरू होगी। नक्षत्र ज्येष्ठा है जो दोपहर 1 बजकर 42 मिनट तक, उसके बाद मूल नक्षत्र है। योग हर्षण है, जो 13 फरवरी की सुबह 3 बजकर 6 मिनट तक है। वहीं, करण विष्टि है, जो 12 बजकर 22 मिनट तक, उसके बाद बव रहेगा।

शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 19 मिनट से 6 बजकर 10 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक है।

वहीं, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 27 मिनट से 3 बजकर 11 मिनट तक है। गोधूलि मुहूर्त शाम बजकर 6 बजकर 6 मिनट से 6 बजकर 32 मिनट तक है। ये मुहूर्त सभी कार्यों के लिए सर्वोत्तम माने जाते हैं।

वहीं, अशुभ समय का विचार भी महत्वपूर्ण है। इसमें नए कार्य करने की मनाही होती है।

राहुकाल दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से 3 बजकर 22 मिनट तक, यमगंड सुबह 7 बजकर 2 मिनट से 8 बजकर 25 मिनट तक है। भद्रा सुबह 7 बजकर 2 मिनट से दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक और गंड मूल पूरे दिन प्रभावी रहेगा। अशुभ समय में नए कार्य, यात्रा या शुभ संस्कार टालने की सलाह दी जाती है। वहीं, ब्रह्म मुहूर्त और अभिजित मुहूर्त में ध्यान, जप, दान और गुरु पूजा करना अत्यंत लाभकारी रहेगा।

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