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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:35 · नई दिल्ली संस्करण

आपातकाल: राजनाथ सिंह बोले- लोकतांत्रिक मूल्यों पर हुआ था प्रहार

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
आपातकाल: राजनाथ सिंह बोले- लोकतांत्रिक मूल्यों पर हुआ था प्रहार

नई दिल्ली। साल 1975 में भारत में लगाए गए आपातकाल को आज 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उस दौर में संविधान के मूल्यों और लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करने के भरसक प्रयास किए गए थे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह काला दिन था, जब देश पर आपातकाल लगाया गया।"

उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान सत्ता के अहंकार में नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन किया गया, प्रेस की स्वतंत्रता को कुचला गया, हजारों राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों व आम नागरिकों को अकारण जेलों में डाला गया और असहमति की आवाजों को दबाया गया।

उस दौर में संविधान के मूल्यों और लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करने के भरसक प्रयास किए गए।

राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिन को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में स्मरण करने का निर्णय लेकर देश को इस काले अध्याय की याद दिलाई है, ताकि भावी पीढ़ियां लोकतंत्र पर हुए उस प्रहार को कभी न भूलें। उन्होंने यह भी कहा कि ये दिन लोकतंत्र, नागरिक स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को फिर से दृढ़ करने का अवसर भी है।

अपने पोस्ट में राजनाथ सिंह ने लिखा, "यह हमें स्मरण कराता है कि संविधान हमारे देश का सबसे पवित्र ग्रंथ तथा हमारे लोकतांत्रिक गणराज्य की सुदृढ़ आधारशिला है, जिसकी रक्षा का दायित्व हम सभी का है।"

इसके साथ ही, राजनाथ सिंह ने आज 'संविधान हत्या दिवस' पर उन सभी लोकतंत्र के सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया, जिन्होंने आपातकाल की तानाशाही के दौर में संघर्ष किया, यातनाएं सहीं और लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि उनका साहस, त्याग और बलिदान हमें सदैव प्रेरित करता रहेगा।

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