बिहार में बिजली क्रांति: नीतीश सरकार की मुफ्त बिजली योजना पर दिल्ली से गूंजा सियासी स्वर

पटना ।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राज्य के सभी घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की ऐतिहासिक घोषणा ने जहां राज्य की आम जनता को बड़ी राहत दी है, वहीं देशभर में इस फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में नई बहस भी शुरू हो गई है। नीतीश कुमार ने 1 अगस्त 2025 से लागू होने वाली इस योजना की जानकारी देते हुए कहा कि इससे राज्य के लगभग 1 करोड़ 67 लाख परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही उन्होंने अगले तीन वर्षों में राज्यभर के घरों की छतों पर या सार्वजनिक स्थलों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना का भी एलान किया, जिससे बिहार में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा।
मुख्यमंत्री ने इस योजना को बिहार की सामाजिक और आर्थिक उन्नति के लिए मील का पत्थर बताया। खासकर अत्यंत निर्धन परिवारों के लिए ‘कुटीर ज्योति योजना’ के अंतर्गत मुफ्त सौर संयंत्र की व्यवस्था और अन्य परिवारों को वित्तीय सहायता देने की बात कहकर उन्होंने राज्य के हर वर्ग को इस पहल में भागीदार बनाने का संकेत दिया। सरकार का अनुमान है कि इस योजना से आने वाले वर्षों में बिहार को करीब 10,000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन की क्षमता प्राप्त होगी।
हालांकि, नीतीश कुमार की इस घोषणा को लेकर अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने तीखा बयान जारी करते हुए कहा कि यह कदम स्पष्ट रूप से अरविंद केजरीवाल की 'दिल्ली मॉडल' से प्रेरित है। उन्होंने याद दिलाया कि जब 2015 में दिल्ली में मुफ्त बिजली देने की योजना लागू की गई थी, तब बीजेपी नेताओं ने उसे अव्यावहारिक और लोकलुभावन करार दिया था। लेकिन आज, उसी नीति को बिहार में अपनाया जा रहा है, जिससे यह साबित होता है कि अंततः जनकल्याण की राह वही है जिसे आम आदमी पार्टी ने सबसे पहले दिखाया।
सौरभ भारद्वाज ने कहा, “यह केवल एक नीति नहीं, बल्कि विचारधारा की जीत है – वह विचारधारा जिसमें जनता की भलाई सबसे ऊपर है। बिहार की योजना दरअसल 'आप' की सोच का विस्तार है, जिसे अब विरोधी दल भी अपनाने को मजबूर हो गए हैं।” उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि 2025 का बिहार, 2015 की दिल्ली की झलक दे रहा है और यह परिवर्तन राजनीतिक सोच में बदलाव का संकेत है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि नीतीश कुमार की यह घोषणा बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बड़ा राजनीतिक संदेश है। जहां एक ओर यह योजना ग्रामीण और शहरी गरीब वर्ग को सीधे राहत देती है, वहीं सौर ऊर्जा पर आधारित दीर्घकालिक नीति राज्य के भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को स्थिरता प्रदान कर सकती है।
बहरहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नीतीश कुमार की यह ‘बिजली क्रांति’ बिहार के राजनीतिक परिदृश्य को फिर से उनके पक्ष में मोड़ सकेगी, या यह विपक्ष के लिए एक नई बहस और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की भूमिका तय करेगी। लेकिन इतना तो तय है कि अब बिजली केवल एक सेवा नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति का निर्णायक मुद्दा बन चुकी है।





