मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:46 · नई दिल्ली संस्करण

बोकारो वन भूमि घोटाले में झारखंड और बिहार में ईडी का छापा

राष्ट्रीय सागर डेस्क1 मिनट का पठन
बोकारो वन भूमि घोटाले में झारखंड और बिहार में ईडी का छापा

रांची। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने आज रांची में कई जगह पर मारा है। रांची के लालपुर, चुटिया और कांके रोड में ईडी की कार्रवाई चल रही है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय ने बोकारो भूमि घोटाले में झारखंड और बिहार के कुल 15 ठिकानों पर छापा मारा है। यह कार्रवाई सुबह करीब सात बजे शुरू की गई।बताया जा रहा है कि रांची में कारोबारी विमल अग्रवाल और पुनीत अग्रवाल के ठिकानों पर ईडी के अधिकारी रिकार्ड खंगाल रहे हैं। इन दोनों की फर्म राजवीर कंस्ट्रक्शन पर भी दबिश दी गई है। इससे पहले 26 सितंबर, 2023 को इनके ठिकानों पर जीएसटी रिकार्ड खंगाल चुकी है। यह सभी बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट से संबद्ध हैं।ईडी की कार्रवाई के दायरे मे बोकारो में 74.38 एकड़ जमीन खरीदने वाले उमायुष मल्टीकॉम प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े लोगों को भी शामिल किया गया है। ईडी ने बोकारो भूमि घोटाले के सिलसिले में विभिन्न थानों में दर्ज प्राथमिकी को ईसीआईआर के रूप में दर्ज करने के बाद यह कार्रवाई शुरू की है। बोकारो में संबंधित जमीन पर विवाद चल रहा है। वन विभाग का यह दावा है कि जमीन प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट है। जबकि जमीन की खरीद बिक्री में शामिल लोगों का यह दावा है कि यह जमीन उसके पूर्वजों ने ब्रिटिश शासन के दौरान 1933 में सरकार की ओर से की गई नीलामी में खरीदी थी।राज्य सरकार और वन विभाग के हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जमीन के सिलसिले में किये गये अलग-अलग दावों की वजह से भारतीय वन सेवा के दो अधिकारी न्यायालय के अवमानना के दोषी करार दिए जा चुके हैं।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें