मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:00 · नई दिल्ली संस्करण

तुंगारेश्वर से काशीविश्वेश्वर तक शिवभक्ति की गूंज, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

राष्ट्रीय सागर डेस्क4 मिनट का पठन
तुंगारेश्वर से काशीविश्वेश्वर तक शिवभक्ति की गूंज, उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

मुंबई। सावन के अंतिम सोमवार के पावन अवसर पर सोमवार सुबह पूरा वसई-विरार शहर भगवान शिव की भक्ति में डूबा नजर आया। शहर के छोटे-बड़े शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए भक्त लंबी कतारों में खड़े नजर आए। मंदिर परिसर और आसपास का वातावरण ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से गूंजता रहा।

वसई के सुप्रसिद्ध श्री तुंगारेश्वर महादेव मंदिर और श्री काशीविश्वेश्वर महादेव मंदिर में भी सावन के अंतिम सोमवार पर श्रद्धालुओं का सैलाब देखने को मिला। रात से ही बड़ी संख्या में शिवभक्त मंदिरों में पहुंचने लगे थे।

वसई-विरार के अलावा दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए तुंगारेश्वर पहुंचे।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए तुंगारेश्वर गेट के प्रवेश मार्ग से लेकर मंदिर परिसर तक पुलिस प्रशासन की ओर से कड़ा बंदोबस्त किया गया।

पुलिसकर्मी भीड़ को नियंत्रित करने, प्रवेश और निकासी व्यवस्था बनाए रखने तथा श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में लगातार जुटे रहे। महत्वपूर्ण स्थानों पर पुलिस की निगरानी रखी गई, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

सावन के अंतिम सोमवार पर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की।

भक्तों ने शिवलिंग पर दूध, बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना की। बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान शिव की आराधना करते भी नजर आए।

सुबह से ही विभिन्न मंदिरों में मंत्रोच्चार, अभिषेक, आरती, भजन और कीर्तन का दौर चलता रहा। महिलाएं, पुरुष, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में मंदिरों में पहुंचे।

सावन के अंतिम सोमवार को लेकर शिवभक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

वसई पूर्व के गोखिवारे स्थित प्राचीन श्री काशीविश्वेश्वर महादेव मंदिर में सावन के अंतिम सोमवार पर विशेष धार्मिक आयोजन किए गए। मंदिर के देवस्थान पुजारी सचिन गुरव ने बताया कि मंदिर की परंपरा पुरातन काल से चली आ रही है और सावन महीने में यहां श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है।

पुजारी सचिन गुरव ने आईएएनएस को बताया कि मंदिर सुबह 4 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। सुबह 5 बजे भगवान महादेव का अभिषेक और रुद्राभिषेक किया जाता है, जिसके बाद सुबह 6 बजे आरती होती है और भक्तों को दर्शन का लाभ दिया जाता है। उन्होंने बताया कि मंदिर में विराजमान प्राचीन शिवलिंग करीब 500 वर्ष पुराना माना जाता है।

शिवलिंग पर पंचामृत अभिषेक के साथ लिंगाष्टक और बिल्वाष्टक पूजा की जाती है। इसके बाद भगवान शिव का विशेष श्रृंगार कर श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था की जाती है।

सचिन गुरव ने बताया कि काशीविश्वेश्वर महादेव मंदिर में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ बोरीवली, अंधेरी और आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सावन के दौरान मंदिर में विशेष उत्साह का माहौल रहता है।

श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार फूल, प्रसाद और अन्य पूजन सामग्री लेकर पहुंचते हैं तथा मंदिर की सेवा और साफ-सफाई में भी सहयोग करते हैं।

उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में भगवान गणेश, दत्त मंदिर, हनुमान मंदिर और राधा-कृष्ण मंदिर भी स्थित हैं। यहां सुबह-शाम संध्या पाठ, भजन और कीर्तन का आयोजन किया जाता है। सावन के अंतिम सोमवार को दोपहर बाद विशेष शिव आरती और शाम को भगवान शिव का विशेष श्रृंगार किया गया। इसके बाद भगवान को शिव मुकुट धारण कराया गया और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

पुजारी सचिन गुरव ने बताया कि वसई क्षेत्र में पापड़ी और तुंगारेश्वर मंदिर की ओर बड़ी संख्या में कांवड़ यात्राएं भी आती हैं।

सावन के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है। उन्होंने कहा कि सावन का महीना भगवान शिव की आराधना और धार्मिक गतिविधियों के लिहाज से विशेष माना जाता है और इस दौरान भक्त तन-मन-धन से मंदिर की सेवा में जुटते हैं।

सचिन गुरव ने अपनी परंपरा का उल्लेख करते हुए बताया कि उनका परिवार पीढ़ियों से भगवान शिव की सेवा से जुड़ा हुआ है और वह बचपन से ही इसी मंदिर में पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। उन्होंने स्वयं को लिंगायत परंपरा का पुजारी बताया।

सावन के अंतिम सोमवार के इस पावन अवसर पर वसई-विरार के मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने शहर की धार्मिक आस्था और भक्ति की गहरी तस्वीर पेश की। चारों ओर गूंजते 'हर-हर महादेव' के जयकारों, मंदिरों की घंटियों और भजन-कीर्तन के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की आराधना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें