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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:35 · नई दिल्ली संस्करण

डॉ. जितेंद्र सिंह बोले- 'विक्रम-1' ने दिखाया निजी स्पेस सेक्टर का दम

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
डॉ. जितेंद्र सिंह बोले- 'विक्रम-1' ने दिखाया निजी स्पेस सेक्टर का दम

नई दिल्ली। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा कि स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग भारत के लिए गर्व का क्षण है और यह देश के स्पेस सेक्टर को निजी कंपनियों के लिए खोलने के फैसले के सकारात्मक और दूरगामी प्रभाव को दर्शाता है।

विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग के बाद आईएएनएस से खास बातचीत में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह हर भारतीय के लिए गर्व का पल है, क्योंकि पहली बार किसी निजी कंपनी ने अपनी योजना के अनुसार अपना रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च किया है।

उन्होंने कहा, "निश्चित रूप से यह हम सभी और पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है।

पहली बार किसी निजी कंपनी ने अपनी योजना के अनुसार अपना रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च किया है।"

डॉ. जितेंद्र सिंह ने आईएएनएस से कहा, "यह इसलिए संभव हो पाया क्योंकि पांच-छह साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साहसिक फैसला लेते हुए देश के स्पेस सेक्टर को निजी कंपनियों के लिए खोल दिया था।"

मिशन से जुड़े सभी पक्षों को बधाई देते हुए मंत्री ने कहा कि स्काईरूट एयरोस्पेस ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से ऑर्बिटल लॉन्च करने वाली भारत की पहली निजी कंपनी बनकर इतिहास रच दिया है।

उन्होंने कहा, "भारत की पहली निजी कंपनी के रूप में श्रीहरिकोटा से यह लॉन्च सफलतापूर्वक करने के लिए स्काईरूट को बधाई। इस शानदार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को संभव बनाने के लिए आईएन-स्पेस को बधाई। इस सहयोग को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने के लिए इसरो को बधाई।

सबसे बढ़कर, इसे संभव बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हार्दिक आभार और उन्हें बहुत-बहुत बधाई।"

मंत्री ने कहा कि केवल 5 वर्षों के भीतर मिली यह तेज प्रगति भारत के स्पेस रिफॉर्म्स की सफलता को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि जिन देशों ने भारत से कई दशक पहले अपना स्पेस प्रोग्राम शुरू किया था, उनकी तुलना में पहली ही कोशिश में सफल लॉन्च का भारत का रिकॉर्ड कहीं बेहतर रहा है।

उन्होंने कहा, "पिछले केवल 5 वर्षों में जो उपलब्धियां हासिल हुई हैं, वे किसी चमत्कार से कम नहीं हैं। स्पेस सेक्टर के लिहाज से 5 साल बहुत लंबा समय नहीं होता। अगर उन देशों से तुलना करें, जिन्होंने हमसे बहुत पहले शुरुआत की थी, तो पहली कोशिश में सफलता का भारत का रिकॉर्ड उनसे कहीं बेहतर है। आज की यह उपलब्धि उसी शानदार रिकॉर्ड में एक और नया अध्याय जोड़ती है।"

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