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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:35 · नई दिल्ली संस्करण

दून साइंस सिटी बनेगी विज्ञान और नवाचार का राष्ट्रीय केंद्र : धामी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
दून साइंस सिटी बनेगी विज्ञान और नवाचार का राष्ट्रीय केंद्र : धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को कहा कि देहरादून में निर्माणाधीन साइंस सिटी आने वाले वर्षों में केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के लिए विज्ञान, नवाचार और अनुसंधान का अग्रणी केंद्र बनेगी। उन्होंने यूकॉस्ट परिसर में स्टार्टअप सेंटर विकसित करने के लिए भूमि उपलब्ध कराने की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने सोमवार को उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद में साइंस सिटी परियोजना के निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने के बाद विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति (एसटीआईपी) परिसंवाद को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार विज्ञान आधारित ज्ञान अर्थव्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने 'विज्ञान सेतु' परिकल्पना के तहत सामुदायिक विज्ञान रेडियो 'विज्ञान वाणी' (88.8 मेगाहर्ट्ज), 'विज्ञान दृश्यम' और 'विज्ञान धारा' का भी लोकार्पण किया।

धामी ने कहा कि वर्तमान समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डेटा साइंस, ड्रोन, सेमीकंडक्टर और बायोटेक्नोलॉजी जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों का है। उत्तराखंड को इन क्षेत्रों में केवल बदलाव स्वीकार नहीं करना, बल्कि नेतृत्व भी करना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तकनीक, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रही है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य की पहली विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति लागू की जा चुकी है, जिसका उद्देश्य युवाओं को रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि नवाचार के माध्यम से रोजगार सृजित करने वाला बनाना है। उन्होंने कहा कि सरकार साइंस एंड इनोवेशन सेंटर, स्टेम लैब, डिजिटल लाइब्रेरी, पेटेंट सूचना केंद्र, लैब्स ऑन व्हील्स तथा एआई, रोबोटिक्स और ड्रोन जैसी भविष्य की तकनीकों को बढ़ावा दे रही है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक चुनौतियों का समाधान स्थानीय संसाधनों और वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से खोजा जा सकता है। राज्य की जैव विविधता, औषधीय वनस्पतियां, जल स्रोत और जैविक कृषि को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़कर उत्तराखंड को विकास का आदर्श मॉडल बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिलक्यारा सुरंग बचाव अभियान को ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणाली (बेस्ट प्रैक्टिस) के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसी के मद्देनजर राज्य सरकार ने प्रत्येक वर्ष 28 नवंबर को आपदा प्रबंधन दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, विधायक सहदेव सिंह पुंडीर, यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, वैज्ञानिक और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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