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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:26 · नई दिल्ली संस्करण

10 सालों में दो हजार कानूनों को खत्म किया गया - प्रधानमंत्री

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
10 सालों में दो हजार कानूनों को खत्म किया गया - प्रधानमंत्री

नई दिल्ली।

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को मुंबई

में महाराष्ट्र विधानमंडल परिसर में 84वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी

सम्मेलन (एआईपीओसी) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वीडियो संदेश

में पीठासीन अधिकारियों को शुभकामनाएं दीं और विश्वास व्यक्त किया कि सम्मेलन के अच्छे परिणाम निकलेंगे। प्रधान

मंत्री ने संविधान सभा के अपार योगदान का स्मरण करते हुए इस बात का उल्लेख किया कि

इतनी विविधता होते हुए भी संविधान सभा के सदस्यों ने अनेक विचारों को समाहित करते

हुए भारत का संविधान तैयार किया। प्रधान मंत्री ने पीठासीन अधिकारियों से कहा कि

हमें उनके कार्यों और उनके जीवन से प्रेरणा लेते हुए भावी पीढ़ियों के मार्गदर्शन

के लिए एक धरोहर छोड़नी चाहिए। उन्होंने पीठासीन अधिकारी मंच का ध्यान भारत के लोगों

की अपने प्रतिनिधियों से बढ़ती अपेक्षाओं

और सार्वजनिक क्षेत्र में उनके आचरण की कड़ी जांच की ओर भी दिलाया। उन्होंने जन

प्रतिनिधियों से विधानमंडलों के साथ-साथ अपने दैनिक जीवन में अनुकरणीय आचरण बनाए

रखने का आह्वान किया क्योंकि इससे पूरे देश के संसदीय लोकतंत्र पर प्रभाव

पड़ता है।

मोदी ने पीठासीन अधिकारियों का ध्यान विधि

निर्माण और विशेष रूप से अप्रचलित कानूनों

को निरस्त करने की ओर भी आकर्षित किया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि ये

कानून व्यवस्था पर ऐसा बोझ हैं जो शासन को

नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं । इस बात का उल्लेख करते हुए कि पिछले 10

वर्षों में केंद्र सरकार ने लगभग 2000 अप्रचलित

कानूनों को निरस्त कर दिया है, प्रधान मंत्री

ने प्रतिनिधियों से अपने राज्यों के कानूनों की बारीकी से जांच करने और ऐसे

कानूनों को निरस्त करने का आह्वान किया जिनसे शासन के सुचारू संचालन में बाधा आती

हैं। उन्होंने हाल ही में पारित ऐतिहासिक नारी शक्ति वंदन कानून की ओर भी ध्यान

आकर्षित करते हुए पीठासीन अधिकारियों से अमृत काल के दौरान ऐसे प्रयासों को मजबूत

करने की दिशा में काम करने का आग्रह किया। प्रधान मंत्री ने प्रतिनिधियों से भारत

के युवाओं को विधायी प्रक्रियाओं में भाग लेने, कानून बनाने में

समान भागीदार बनने और एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण में भागीदार बनने के लिए

प्रोत्साहित करने का भी आह्वान किया।

सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए, लोक

सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधानमंडलों में अनुशासनहीनता, कार्यवाही में

व्यवधान और असंसदीय आचरण की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे

विधानमंडलों की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है। बिरला ने यह भी कहा कि

लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति व्यक्त करने के लिए गुंजाइश है, इसलिए

व्यवधान के माध्यम से विरोध और असहमति नहीं जताई जानी चाहिए। श्री बिरला ने कहा कि

विधानमंडलों की प्रतिष्ठा और गरिमा को बनाए रखना और विधानमंडलों में मर्यादापूर्ण

आचरण को बनाए रखना सर्वोपरि है, लेकिन यह चिंता का विषय है कि इन

मुद्दों पर आम सहमति होने के बावजूद, हम अभी तक सदन के सुचारू कामकाज के लिए

अपनी प्रतिबद्धताओं को लागू नहीं कर पाए हैं।

इस बात पर जोर देते हुए कि जन

प्रतिनिधियों का आचरण संसदीय मर्यादाओं के अनुरूप होना चाहिए,

बिरला ने सदस्यों से सदन में अपना समय रचनात्मक कार्यों में लगाने का आग्रह किया।

इस संबंध में, बिरला ने सुझाव दिया कि यदि आवश्यक हो तो

नियमों में बदलाव करते हुए ठोस और निश्चित कार्य योजना तैयार की जानी चाहिए,

ताकि

यह सुनिश्चित किया जा सके कि विधानमंडल बिना किसी व्यवधान के कार्य करें।

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