दिग्विजय सिंह बोले — बिहार में भर्तियों की आड़ में चल रहा है घोटालों का गोरखधंधा, लेकिन खुद के दामन पर लगे दाग क्यों भूल जाते हैं?

बिहार में
भर्तियों का गोरखधंधा या राजनीतिक एजेंडा? दिग्विजय सिंह के आरोपों से गरमाई चुनावी सियासत
बिहार में
विधानसभा चुनाव की दस्तक के साथ ही राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का
सिलसिला तेज़ हो गया है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने पटना में प्रेस
कॉन्फ्रेंस कर बिहार सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (यूनाइटेड) [JDU] की सत्ता में चल रहे सरकारी भर्ती
घोटालों और पेपर लीक माफिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
दिग्विजय सिंह ने
कहा कि, “बिहार में जितने
पेपर लीक होते हैं, उतने पूरे देश में
कहीं नहीं होते। यहां पेपर लीक अब उद्योग बन चुका है और इसमें सत्ता की सरपरस्ती
स्पष्ट दिखती है। सात सालों में दस से अधिक परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं, लेकिन किसी ठोस कार्रवाई का कोई परिणाम
सामने नहीं आया है।”
पेपर लीक के प्रमुख मामले:
2017: सिपाही भर्ती
परीक्षा का पेपर लीक, परीक्षा रद्द, 21 FIR दर्ज
2019–2021: पुलिस भर्ती
परीक्षा में पेपर लीक, जांच अधूरी
2021–2022: उत्पाद विभाग
परीक्षा में पेपर लीक
2022: प्रतिष्ठित BPSC परीक्षा का पेपर लीक
2023: फिर से
सिपाही भर्ती परीक्षा का पेपर लीक, परीक्षा रद्द
अमीन भर्ती
परीक्षा, NEET परीक्षा, शिक्षा व
स्वास्थ्य विभाग भर्ती – सभी में पेपर माफिया की गहरी पैठ उजागर
परीक्षा पेपरों के "रेट कार्ड" ने खोली व्यवस्था
की पोल:
दिग्विजय सिंह ने
खुलासा किया कि बिहार में पेपर माफिया ने हर परीक्षा के लिए रेट फिक्स कर रखे हैं —
NEET PG: ₹70–80 लाख
NEET UG: ₹30–40 लाख
बैंकिंग
परीक्षा: ₹15–20 लाख
SSC परीक्षा: ₹15–20 लाख
SI भर्ती: ₹25 लाख
सिपाही
भर्ती: ₹10–15 लाख
पटवारी
परीक्षा: ₹10 लाख
इन आँकड़ों से
स्पष्ट है कि बिहार में भर्ती प्रक्रिया
केवल शिक्षा का नहीं, बल्कि नैतिकता और
पारदर्शिता का भी मज़ाक बन चुकी है।
दिग्विजय सिंह बोले — भर्तियों की आड़ में चल रहा है घोटालों का गोरखधंधा, लेकिन खुद के दामन पर लगे दाग क्यों भूल जाते हैं?
उन्होंने 2017 से लेकर 2023 तक बिहार में हुए 10 से अधिक पेपर लीक मामलों की फेहरिस्त गिनाई — सिपाही भर्ती से लेकर BPSC, अमीन भर्ती, NEET और स्वास्थ्य विभाग की परीक्षाओं तक — और यह दावा किया कि हर परीक्षा का अपना "रेट कार्ड" तय है।
लेकिन सवाल यह भी उठता है...
क्या दिग्विजय सिंह यह भूल जाते हैं कि जब उनकी पार्टी सत्ता में थी, तब भी भ्रष्टाचार और भर्ती घोटालों की भरमार रही?
UPA की सरकार तो एक के बाद एक घोटालों की झड़ी के कारण ही सत्ता से बाहर हुई — 2G घोटाला, CWG घोटाला, कोयला आवंटन घोटाला, और न जाने कितने और घोटाले...
राजस्थान का भी उदाहरण सामने है
जब राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी, तब राज्य की पुलिस भर्ती परीक्षा में खुलकर पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं। उस समय कांग्रेस नेतृत्व द्वारा किए गए "व्यवस्थागत भ्रष्टाचार" का ही परिणाम है कि आज भी राजस्थान में बीजेपी सरकार उन्हीं पुलिस अधिकारियों और युवाओं को गिरफ्तार कर रही है, जो कांग्रेस सरकार में धांधली से भर्ती हुए थे।
दोमुंही राजनीति की आड़ में जनहित का दिखावा या वास्तव में जनता की चिंता
जब विपक्ष में होते हैं, तो कांग्रेस नेता भ्रष्टाचार और माफिया राज की बातें जोर-शोर से उठाते हैं, लेकिन जब सत्ता में आते हैं तो उन्हीं माफियाओं को संरक्षण देना उनकी रणनीति बन जाती है। क्या यह सिर्फ चुनावी नैरेटिव गढ़ने का प्रयास है या वास्तव में युवाओं की चिंता?
बिहार में पेपर लीक की घटनाएं चिंता का विषय हैं, इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन जब कांग्रेस के नेता इन मुद्दों को उठाते हैं, तो उन्हें अपने कार्यकाल की सच्चाई और दागदार इतिहास को भी याद रखना चाहिए। जनता अब सिर्फ आरोपों से नहीं, ईमानदार जवाबदेही और दोहरे मापदंडों की समाप्ति की उम्मीद करती है।
अब समय है कि सभी दल युवाओं के भविष्य को राजनीति का मोहरा बनाना बंद करें — और ईमानदारी से व्यवस्था को सुधारने की पहल करें।





