मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 9:21 · नई दिल्ली संस्करण

धनतेरस, यम दीपम और शनि त्रयोदशी का विशेष संयोग, जानें महत्व, पूजा का समय और उपाय

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
धनतेरस, यम दीपम और शनि त्रयोदशी का विशेष संयोग, जानें महत्व, पूजा का समय और उपाय

नई दिल्ली। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि शनिवार, 18 अक्टूबर को दोपहर 12:18 बजे तक रहेगी, जिसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू हो जाएगी। इस दिन धनतेरस, यम दीपम और शनि त्रयोदशी का विशेष संयोग बन रहा है।

द्रिक पंचांग के अनुसार, शनिवार के दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय सुबह 9 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर 10 बजकर 40 मिनट तक रहेगा।

द्वादशी तिथि का समय 17 अक्टूबर सुबह 11 बजकर 12 मिनट से शुरू होकर 18 अक्टूबर दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। इसके बाद त्रयोदशी शुरू हो जाएगी, जिसके हिसाब से त्रयोदशी मनाई जाएगी।

शनि त्रयोदशी का उल्लेख शिव पुराण और स्कंद पुराण दोनों में मिलता है। यह व्रत चंद्र मास की दोनों त्रयोदशी को किया जाता है। प्रदोष व्रत के दिन के अनुसार, इसे सोम प्रदोष, भौम प्रदोष और शनि प्रदोष कहा जाता है, जब यह क्रमशः सोमवार, मंगलवार और शनिवार को पड़ता है। यह व्रत नाना प्रकार के संकट और बाधाओं से मुक्ति दिलाने के लिए किया जाता है।

भगवान शिव शनिदेव के गुरु हैं, इसलिए यह व्रत शनि ग्रह से संबंधित दोषों, कालसर्प दोष और पितृ दोष के निवारण के लिए भी उत्तम माना जाता है। इस व्रत के पालन से भगवान शिव की कृपा से सभी ग्रह दोषों से मुक्ति प्राप्त होती है और शनि देव की कृपा से कर्मबन्धन काटने में मदद मिलती है।

इस दिन सूर्यास्त के समय प्रदोष काल में शिवलिंग की पूजा की जाती है और शनि मंत्रों के जाप और तिल, तेल व दान-पुण्य करने का प्रावधान है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो शनि की दशा से पीड़ित हैं।

इसी के साथ ही इस दिन धनतेरस भी है। यह पर्व त्रयोदशी तिथि को प्रदोष काल में मनाया जाता है, जो सूर्यास्त के बाद लगभग 2 घंटे 24 मिनट तक रहता है।

इस समय स्थिर लग्न, खासकर वृषभ लग्न, में पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि इससे मां लक्ष्मी घर में स्थायी रूप से विराजमान होती हैं।

धनतेरस पर शाम को 13 दीपक जलाकर भगवान कुबेर की पूजा करें। पूजा के दौरान मंत्र "यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्य अधिपतये धन-धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा" का जाप करें। 13 कौड़ियां रात में गाड़ने से धन लाभ होता है। घर के अंदर और बाहर 13-13 दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। मां लक्ष्मी को लौंग अर्पित करने और सफेद वस्तुएं जैसे दूध, चावल या कपड़े दान करने से धन की कमी नहीं होती। किन्नर को दान देना और उनसे सिक्का मांगना भी शुभ है।

पेड़ की टहनी लाकर घर में रखने और मंदिर में पौधा लगाने से समृद्धि और सफलता मिलती है। दक्षिणावर्ती शंख में जल छिड़कने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

धनतेरस के दिन संध्या समय यम दीपम जलाने की परंपरा है। त्रयोदशी तिथि को घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा में एक दीपक जलाएं। यह दीपक यमराज को समर्पित होता है। मान्यता है कि इससे यमदेव प्रसन्न होते हैं और परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु से रक्षा करते हैं। इस दीपक को जलाते समय दीर्घायु और सुरक्षा की प्रार्थना करें।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें