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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:15 · नई दिल्ली संस्करण

दिल्ली जल बोर्ड को मिले ऐतिहासिक अधिकार: अब योजनाएं नहीं होंगी फाइलों में बंद, यमुना शुद्धिकरण से लेकर जल आपूर्ति तक आएगा क्रांतिकारी बदलाव

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
दिल्ली जल बोर्ड को मिले ऐतिहासिक अधिकार: अब योजनाएं नहीं होंगी फाइलों में बंद, यमुना शुद्धिकरण से लेकर जल आपूर्ति तक आएगा क्रांतिकारी बदलाव

दिल्ली जल बोर्ड को मिले ऐतिहासिक अधिकार: अब योजनाएं नहीं होंगी फाइलों में बंद, यमुना शुद्धिकरण से लेकर जल आपूर्ति तक आएगा क्रांतिकारी बदलाव

नई दिल्ली | 9 जुलाई 2025 :दिल्ली सरकार ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला निर्णय लेते हुए दिल्ली जल बोर्ड (DJB) को वित्तीय स्वायत्तता के मामले में अभूतपूर्व शक्तियाँ प्रदान की हैं। इस फैसले के तहत अब जल बोर्ड 50 करोड़ रुपये तक की परियोजनाएं स्वयं स्वीकृत कर सकेगा और उन्हें बिना किसी बाहरी बाधा के तेज़ी से क्रियान्वित भी कर पाएगा। यह निर्णय राजधानी की जल आपूर्ति और पर्यावरणीय संरक्षण से जुड़ी बहुप्रतीक्षित परियोजनाओं को नई गति देने वाला माना जा रहा है।

नई व्यवस्था के तहत जल बोर्ड के अध्यक्ष को ₹50 करोड़, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को ₹25 करोड़ और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी अलग-अलग सीमाओं तक वित्तीय अधिकार दिए गए हैं। इसका सीधा अर्थ है कि अब यमुना की सफाई, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STP), बूस्टिंग स्टेशन, पाइपलाइनों का विस्तार और जलापूर्ति से जुड़े ढांचागत कार्य कैबिनेट की स्वीकृति या अनावश्यक फाइल प्रक्रियाओं में नहीं उलझेंगे। निर्णय प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाते हुए राजधानी की जनता तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से पहुंचाया जाएगा।

यह बदलाव केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का नहीं, बल्कि एक नई कार्यसंस्कृति की शुरुआत है। अब दिल्ली जल बोर्ड एक प्रतीकात्मक संस्था भर नहीं, बल्कि यमुना के शुद्धिकरण, नालों के वैज्ञानिक उपचार और हर घर तक सुरक्षित, स्वच्छ जल पहुंचाने की दिशा में सक्रिय, सशक्त और उत्तरदायी संस्था बन चुका है।

इस निर्णय के दूरगामी प्रभावों को समझते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि अब राजधानी की जल परियोजनाएं वास्तव में जमीन पर उतरेंगी, और जनता को हर स्तर पर इसका लाभ मिलेगा। वित्तीय स्वायत्तता के इस कदम से जहां कार्यप्रणाली में तेज़ी आएगी, वहीं भ्रष्टाचार और अनावश्यक देरी की गुंजाइश भी काफी हद तक समाप्त होगी। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले वर्षों में दिल्ली जल बोर्ड की भूमिका राजधानी की जल संकट और प्रदूषण के समाधानकर्ता के रूप में और अधिक निर्णायक साबित होगी।

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