दिल्ली जल बोर्ड की डिजिटल नाकामी: ₹10 करोड़ की साइबर ठगी के एक महीने बाद भी नहीं मिला जवाब — क्या उपभोक्ता अब भी असुरक्षित हैं?

दिल्ली जल बोर्ड की डिजिटल नाकामी: ₹10 करोड़ की साइबर ठगी के एक महीने बाद भी नहीं मिला जवाब , क्या उपभोक्ता अब भी असुरक्षित हैं?
चुप्पी, लापरवाही और ज़िम्मेदारी से भागता सिस्टम
नई दिल्ली | 8 जुलाई 2025
1 महीने पहले की साइबर सेंधमारी, आज भी जारी है संस्थागत चुप्पी
देश की राजधानी दिल्ली में जल आपूर्ति संभालने वाला प्रमुख संस्थान दिल्ली जल बोर्ड (DJB) आज स्वयं एक डिजिटल आपदा का प्रतीक बन चुका है।
जून 2025 में DJB के “Know Your KNO” पोर्टल में सामने आई गंभीर सुरक्षा खामी ने न केवल लाखों उपभोक्ताओं की निजी जानकारियों को उजागर किया, बल्कि ₹10 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी को भी जन्म दिया।
चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे एक महीने बाद भी न DJB ने कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण दिया, न सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट जारी की, और न ही कोई माफ़ी मांगी। यह चुप्पी अब जनता के लिए चिंता नहीं, बल्कि सीधा खतरा बन चुकी है।
‘Know Your KNO’: सरकारी सुविधा या साइबर अपराधियों के लिए ‘ओपन गेट’?
‘Know Your KNO’ पोर्टल उपभोक्ताओं को उनके जल बिल और कनेक्शन की जानकारी देने के लिए शुरू किया गया था। लेकिन इस पोर्टल में इतना बुनियादी वेरिफिकेशन भी नहीं था कि कोई भी केवल 10 अंकों का KNO डालकर उपभोक्ता का:
पूरा नाम
पता
मोबाइल नंबर
खाता संख्या
और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां आसानी से देख सकता था।
यह कोई हैक नहीं, बल्कि सीधे DJB का छोड़ा हुआ खुला दरवाज़ा था, जिससे साइबर अपराधी अंदर घुसे — बिना कोई तकनीकी तोड़फोड़ किए।
‘आपका जल कनेक्शन काटा जा रहा है’ — भय पैदा कर ठगी
इस सुरक्षा चूक का फायदा उठाकर झारखंड के जामताड़ा, देवघर और अन्य साइबर ठगी के गढ़ों से ठगों ने दिल्ली के उपभोक्ताओं को टारगेट किया।
वे नकली कॉल्स, SMS और फर्जी पेमेंट लिंक भेजते हुए कहते:
“आपका जल कनेक्शन काटा जा रहा है।”
“₹10 का बिल बाकी है — तुरंत पेमेंट करें।”
“पिछले महीने की रसीद ग़लत है — यह लिंक खोलें।”
इस तरह के संदेशों के जरिये लोगों को भयभीत कर उन्हें फर्जी ऐप डाउनलोड कराए गए, जिससे उनके मोबाइल एक्सेस कर, बैंक खातों से ₹20,000 से ₹50,000 तक की रकम उड़ा दी गई।
पुलिस ने पकड़े अपराधी लेकिन DJB पर अब भी सन्नाटा
दिल्ली पुलिस की साइबर शाखा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए झारखंड से तीन प्रमुख अपराधियों — रवि मंडल, रमेश कुमार मंडल, और महेंद्र मंडल — को गिरफ्तार किया।
उनके पास से:
सैकड़ों नकली बैंक खातों के दस्तावेज,
सैकड़ों सिम कार्ड्स,
डिजिटल डिवाइसेज़ बरामद हुए।
लेकिन सवाल यह है कि दिल्ली जल बोर्ड के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
क्या DJB की तकनीकी टीम पर कोई जांच बैठी?
क्या पोर्टल विकसित करने वाली एजेंसी से जवाब मांगा गया?
क्या जनता से माफ़ी मांगी गई?
क्या कोई पारदर्शी रिपोर्ट सार्वजनिक हुई?
उत्तर है — नहीं। पूर्ण चुप्पी।
डिजिटल भारत में, DJB का सिस्टम मानसिक रूप से ऑफलाइन?
एक महीना बीत चुका है। लेकिन न कोई तकनीकी अपडेट, न सुरक्षा उपाय, और न ही भविष्य की कोई योजना सामने आई है। यह दर्शाता है कि DJB:
या तो डिजिटल खतरे की गंभीरता नहीं समझता,
या फिर जनता को जवाबदेह नहीं मानता।
यह सिस्टम की सबसे खतरनाक स्थिति होती है जहां लापरवाही संस्थागत चरित्र बन चुकी हो।
साइबर विशेषज्ञों की दो टूक चेतावनी :
साइबर लॉ एक्सपर्ट कहते हैं:
“यह कोई छोटी तकनीकी गलती नहीं थी — यह सरकारी स्तर पर डाटा की हत्या है। यदि DJB जैसे संस्थान जवाबदेह नहीं हुए, तो यह और बड़ी आपदाओं को न्योता है।”
डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ कहती हैं:
“सरकारी संस्थाएं जब तक अपनी गलती मानेंगी नहीं, तब तक हर नागरिक सिर्फ एक क्लिक दूर रहेगा अगली ठगी का शिकार बनने से।”
जनता के तीखे सवाल : DJB अब जवाब दे
दिल्ली के लक्ष्मी नगर, जनकपुरी, द्वारका, बदरपुर, संगम विहार समेत सैकड़ों इलाकों के लोग पूछ रहे हैं:
क्या हमारी निजी जानकारी अब सुरक्षित है?
क्या पोर्टल को अब वेरिफिकेशन से सुरक्षित किया गया है?
क्या ऐसे साइबर हमले दोबारा नहीं होंगे?
क्या DJB हमारे भरोसे के लायक है?
लेकिन DJB की ओर से अब तक केवल एक जवाब मिला है — “सन्नाटा।”
DJB की साख, जवाबदेही और टेक्नोलॉजी तीनों पर सवाल
क्या दिल्ली जल बोर्ड डिजिटल युग की ज़रूरतों को समझता है?
क्या वह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के संचालन की न्यूनतम योग्यता रखता है?
और सबसे जरूरी — क्या उसमें सुधार की इच्छाशक्ति है?
अब समय है कि DJB जनता के सामने आए, और निम्नलिखित चार सवालों का स्पष्ट, लिखित और सार्वजनिक जवाब दे:
क्या तकनीकी चूक पूरी तरह ठीक की गई है?
क्या पोर्टल अब सुरक्षित है?
क्या जिम्मेदार एजेंसी और कर्मियों पर कार्रवाई हुई?
क्या एक पारदर्शी सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट जारी की गई?
DJB की चुप्पी सिर्फ तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि जनता- जनार्दन के साथ धोखा है।
जब तक दिल्ली जल बोर्ड इन सवालों का जवाब नहीं देता, तब तक राजधानी के नागरिक खुद को असुरक्षित मानने के लिए पूरी तरह वाजिब हैं।
रिपोर्ट: चन्दन कुमार झा
स्रोत: दिल्ली पुलिस, साइबर विशेषज्ञ, मीडिया रिपोर्ट्स, ऑनलाइन आर्टिकल्स व् अन्य





