कांग्रेस की तुष्टिकरण राजनीति फिर बेनकाब: ओबीसी आरक्षण पर दोहरा रवैया उजागर

कांग्रेस की तुष्टिकरण राजनीति फिर बेनकाब: ओबीसी आरक्षण पर दोहरा रवैया उजागर
तेलंगाना में हालिया घटनाक्रम ने एक बार फिर कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति को कठघरे में खड़ा कर दिया है। राज्य सरकार द्वारा घोषित 42% ओबीसी आरक्षण में से 10% हिस्सा मुस्लिम समुदाय को दिए जाने की घोषणा ने न केवल संवैधानिक मर्यादाओं को चुनौती दी है, बल्कि ओबीसी समाज के अधिकारों पर भी सीधा प्रहार किया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए स्पष्ट किया है कि धर्म के आधार पर किसी भी प्रकार का आरक्षण असंवैधानिक और सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।
तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की सरकारें बार-बार मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए ओबीसी आरक्षण में कटौती करती हैं, जिससे वास्तविक पिछड़े वर्गों के हक छीने जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ वोट बैंक की राजनीति है, जो न तो संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) के अंतर्गत है और न ही मंडल आयोग की सिफारिशों के अनुरूप।
यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस ने ओबीसी अधिकारों से समझौता किया है। 2006 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने सच्चर समिति के नाम पर मुस्लिम समुदाय को 'पिछड़ा' घोषित कर आरक्षण की मांग तेज की थी। यही नहीं, जब सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक आधार पर आरक्षण देने पर रोक लगाई, तब भी कांग्रेस शासित राज्य पीछे नहीं हटे।
ओबीसी समाज, जो वर्षों से सामाजिक-शैक्षणिक पिछड़ेपन से जूझ रहा है, उनके हक में कटौती कर कांग्रेस अपनी विचारधारा का असली चेहरा दिखा रही है। यह न केवल ओबीसी समाज के साथ अन्याय है, बल्कि संविधान की आत्मा के साथ धोखा भी है।
ऐसे समय में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार सामाजिक न्याय को सशक्त बनाने की दिशा में 'विश्वकर्मा योजना', 'ओबीसी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति' और 'राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा' देने जैसे कदम उठा रही है, कांग्रेस की ओछी राजनीति देश की प्रगति में बाधक साबित हो रही है।
देश को अब यह तय करना होगा कि वह तुष्टिकरण की राजनीति चाहती है या समावेशी और निष्पक्ष सामाजिक न्याय की व्यवस्था। कांग्रेस की नीतियों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि उनके लिए समाज का एक वर्ग केवल वोट बैंक है, न कि सम्मानित नागरिक।





