ब्रिक्स सम्मेलन की आड़ में कांग्रेस का पीएम मोदी पर वार, जयराम रमेश बोले – ‘सुपर प्रीमियम फ्रीक्वेंट फ्लायर’ बन गए हैं प्रधानमंत्री

ब्रिक्स सम्मेलन की आड़ में कांग्रेस का पीएम मोदी पर वार, जयराम रमेश बोले – ‘सुपर प्रीमियम फ्रीक्वेंट फ्लायर’ बन गए हैं प्रधानमंत्री
नई दिल्ली, 6 जुलाई 2025 — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्राजील यात्रा और 17वें BRICS शिखर सम्मेलन में भागीदारी को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रधानमंत्री को "सुपर प्रीमियम फ्रीक्वेंट फ्लायर प्रधानमंत्री" करार देते हुए कहा कि घाना, त्रिनिदाद एंड टोबैगो और अर्जेंटीना के बाद अब प्रधानमंत्री ब्राजील पहुंच गए हैं, जहां आज से रियो डी जनेरियो में BRICS सम्मेलन की शुरुआत हो रही है।
जयराम रमेश ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) पोस्ट में मोदी सरकार पर कटाक्ष करते हुए लिखा कि यह सम्मेलन दरअसल बहुध्रुवीय वैश्विक नेतृत्व की अवधारणा से निकले उस प्रयास का हिस्सा है, जिसकी बुनियाद भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जैसे दूरदर्शी नेताओं ने रखी थी। उन्होंने याद दिलाया कि BRICS की संकल्पना की शुरुआत 1998 में रूस के प्रधानमंत्री येवगेनी प्रिमाकोव के RIC (रूस-भारत-चीन) प्रस्ताव से हुई थी, जिसे बाद में Goldman Sachs की रिपोर्ट “Building Better Global Economic BRICs” (2001) ने वैश्विक मंच पर उभारा।
जयराम रमेश के मुताबिक BRICS के पहले औपचारिक शिखर सम्मेलन में डॉ. मनमोहन सिंह ने 2009 में हिस्सा लिया था, और 2012 में भारत की मेजबानी में आयोजित हुए सम्मेलन में BRICS डेवलपमेंट बैंक की स्थापना का विचार भी डॉ. सिंह ने ही रखा था, जो आगे चलकर शंघाई स्थित न्यू डेवलपमेंट बैंक बना और भारत के बैंकिंग विशेषज्ञ के. वी. कामथ इसके पहले अध्यक्ष बने।
रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि जहां कांग्रेस के नेतृत्व में भारत ने BRICS के बुनियादी ढांचे, विचारधारा और संस्थागत ढांचे को खड़ा किया, वहीं आज की सरकार सिर्फ विदेश दौरों की संख्या बढ़ा रही है, जबकि देश में स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और महंगाई जैसे मुद्दों पर कोई ठोस प्रगति नहीं दिखती।
हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि BRICS के विस्तार और हालिया वर्षों में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई और इंडोनेशिया जैसे नए देशों की सदस्यता भारत के लिए कूटनीतिक अवसर हैं, परंतु उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या इन मंचों का उपयोग भारत अपनी रणनीतिक ताकत बढ़ाने के लिए कर रहा है या केवल दिखावटी वैश्विक यात्राओं का माध्यम बन गया है?
जयराम रमेश का यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री मोदी लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का नेतृत्व कर रहे हैं। समर्थक इसे वैश्विक स्तर पर भारत की साख बढ़ाने वाला कदम मानते हैं, जबकि विपक्ष इसे जमीनी समस्याओं से ध्यान भटकाने की रणनीति बता रहा है।
BRICS जैसे मंच की ऐतिहासिक और वैचारिक विरासत को रेखांकित करते हुए कांग्रेस ने यह जताने की कोशिश की है कि जो मंच आज भारत के वैश्विक प्रभाव का प्रतीक बना है, उसकी नींव उसी पार्टी ने रखी थी जिसे आज सत्ता में बैठे नेता "विकास विरोधी" करार देते हैं।
यह बयान केवल एक आलोचना नहीं, बल्कि विदेश नीति की दिशा और प्राथमिकताओं पर एक बड़ा राजनीतिक विमर्श है – जिसमें सवाल यह है कि क्या आज की सरकार संस्थाओं का निर्माण कर रही है या केवल उनका उपयोग कर रही है?





