जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की कांग्रेस ने दोहराई मांग, केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप

जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की कांग्रेस ने दोहराई मांग, केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
नई दिल्ली, 23 जुलाई — कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग दोहराई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव के बाद राज्य का दर्जा बहाल करने का जो वादा किया था, वह दस महीने बीतने के बावजूद अब तक पूरा नहीं किया गया है।
बुधवार को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं — पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, जम्मू-कश्मीर के प्रभारी महासचिव डॉ. नसीर हुसैन, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और जम्मू-कश्मीर कांग्रेस विधायक दल के नेता गुलाम अहमद मीर और प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंदर शर्मा — ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर की जनता आज भी राजनीतिक अधिकारों से वंचित है।
गुलाम अहमद मीर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने जून 2021 में राजनीतिक प्रतिनिधियों के साथ बैठक में चुनाव के बाद राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया था। यहां तक कि केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में भी इस वादे को दोहराया था। अक्टूबर 2024 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद चुनी गई सरकार ने राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव भी पारित किया, लेकिन दस महीने बीत जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
उन्होंने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाकर जम्मू-कश्मीर के विभाजन की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि इससे राज्य की ऐतिहासिक पहचान और प्रशासनिक शक्ति को नुकसान पहुंचा है। कांग्रेस इस फैसले को असंवैधानिक और अन्यायपूर्ण मानती है और तब से लगातार इसके खिलाफ आवाज उठा रही है। उन्होंने बताया कि पार्टी ने पांच महीने पहले राज्य का दर्जा बहाल कराने और स्थानीय लोगों को जमीन, नौकरियों और संसाधनों पर हक दिलाने के लिए एक आंदोलन की शुरुआत की है।
मीर ने यह भी याद दिलाया कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने श्रीनगर में राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रतिबद्धता जताई थी और प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा था। उन्होंने जम्मू और श्रीनगर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर की गई पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि पार्टी 22 जुलाई को जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन कर चुकी है, और अब आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस गठबंधन सरकार का हिस्सा तो है, लेकिन जब तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं होता, वह मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री को पुलिस द्वारा रोके जाने की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। इसके साथ ही उन्होंने लद्दाख की स्थिति का उल्लेख करते हुए वहां की जनजातीय आबादी के लिए संविधान की छठी अनुसूची लागू करने और दिल्ली–पुडुचेरी मॉडल की तर्ज पर एक निर्वाचित विधानसभा की मांग की।
वहीं डॉ. नसीर हुसैन ने कहा कि चुनाव के बावजूद जम्मू-कश्मीर की सरकार के पास कोई वास्तविक शक्ति नहीं है और सारी प्रशासनिक कमान उपराज्यपाल के हाथ में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि वहां लोकतंत्र पूरी तरह से बहाल हो और जनता को उनका संवैधानिक हक मिल सके।





