गुजरात में मनरेगा घोटाले पर कांग्रेस का बड़ा आरोप: मंत्री बच्चू भाई खाबड़ को बर्खास्त कर सीबीआई जांच की मांग

गुजरात में मनरेगा घोटाले पर कांग्रेस का बड़ा आरोप: मंत्री बच्चू भाई खाबड़ को बर्खास्त कर सीबीआई जांच की मांग
नई दिल्ली, 09 जुलाई —
कांग्रेस ने गुजरात में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत हुए एक कथित घोटाले को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने बुधवार को प्रेस वार्ता कर कहा कि प्रदेश के पंचायत एवं कृषि राज्य मंत्री बच्चू भाई खाबड़ और उनके परिवार ने मनरेगा के फर्जी वर्क ऑर्डर बनवाकर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की है। उन्होंने इस पूरे मामले की अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच और मंत्री की तत्काल बर्खास्तगी की मांग की।
गोहिल ने बताया कि मंत्री की निजी भूमि पर मनरेगा के तहत स्टॉर्मवाटर ड्रेन, बांध, कैनाल, लैंड लेवलिंग और वृक्षारोपण जैसे कार्य दर्शाए गए, जो वास्तव में कभी हुए ही नहीं। हैरानी की बात यह है कि जो काम ज़मीन पर हुआ ही नहीं, उनका कागज़ों पर नवीनीकरण तक दर्शा दिया गया। उन्होंने दस्तावेज़ों के माध्यम से बताया कि इस घोटाले में सिर्फ मंत्री ही नहीं, उनका पूरा परिवार भी संलिप्त है। मंत्री के बेटे बलवंत खाबड़ की कंपनी ‘राज कंस्ट्रक्शन’ को मनरेगा के तहत सामग्री आपूर्ति का ठेका मिला, लेकिन वस्तुतः कोई सामग्री नहीं भेजी गई। इतना ही नहीं, इस कंपनी ने मनरेगा के तहत करोड़ों रुपये लिए लेकिन जीएसटी का भुगतान नहीं किया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि जब कांग्रेस नेताओं पर मामूली आरोप लगते हैं तो ईडी और सीबीआई सक्रिय हो जाती हैं, लेकिन भाजपा सरकार के मंत्री के खिलाफ पुख्ता सबूत होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही। गोहिल ने वित्त मंत्रालय से भी अपील की कि जीएसटी चोरी के इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने ‘हर घर जल’ योजना में हुए भ्रष्टाचार की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
वहीं, गोहिल ने वडोदरा के निकट महिसागर नदी पर बने मुजपुरा गंभीरा पुल के ढहने की त्रासदी को भी भाजपा शासन में व्याप्त भ्रष्टाचार का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि इस दुर्घटना में दस लोगों की जान चली गई और कई घायल हुए। स्थानीय लोगों और जिला परिषद के पूर्व प्रतिनिधियों ने प्रशासन को पुल की जर्जर स्थिति के बारे में पहले ही सूचित किया था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। नवीनीकरण के नाम पर भ्रष्टाचार हुआ और पुल की मरम्मत करने वाली एजेंसी को भाजपा के संरक्षण में अनुचित लाभ दिया गया।
गोहिल ने आरोप लगाया कि गुजरात में ठेकेदारों को पहले भाजपा कार्यालय में “कमीशन” देना पड़ता है, उसके बाद ही काम मिलता है। इस भ्रष्टाचार की वजह से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता गिर गई है और इसी का नतीजा है कि राज्य में एक के बाद एक बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं।
कुल मिलाकर, कांग्रेस ने यह मामला केवल एक घोटाले तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे गुजरात में भ्रष्टाचार के एक बड़े ‘सिस्टम’ की संज्ञा दी है। पार्टी ने इस पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए सरकार पर लोकतंत्र और जनधन की उपेक्षा का आरोप लगाया है।





