'कलेक्टर को प्रॉपर्टी विवाद पर फैसला लेने का अधिकार नहीं' – वक्फ कानून के कई प्रावधानों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून (Waqf Act) के कुछ प्रावधानों पर अंतरिम रोक लगाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब कलेक्टर को प्रॉपर्टी विवादों में निर्णय लेने का अधिकार नहीं होगा। यह रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक कि संशोधन की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता।
सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने सोमवार को यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि कानून के संपूर्ण प्रावधानों पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं है, लेकिन कुछ विशेष धाराओं पर अंतरिम संरक्षण जरूरी है।
कलेक्टर को अधिकार नहीं
सीजेआई बीआर गवई ने कहा कि नागरिकों के व्यक्तिगत अधिकारों का फैसला लेने का अधिकार कलेक्टर को नहीं दिया जा सकता। इसलिए कलेक्टर को ऐसे मामलों में शक्तियां देने वाले प्रावधान पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।
5 साल की प्रैक्टिस की शर्त पर रोक
कोर्ट ने वक्फ करने के लिए कम से कम 5 साल तक इस्लाम की प्रैक्टिस करने की अनिवार्यता पर भी अंतरिम रोक लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस शर्त को लागू नहीं किया जाएगा, जब तक कि मामले पर अंतिम फैसला नहीं आता।
वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों की सीमा तय
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ निकायों में गैर-मुस्लिमों की सदस्यता पर भी विचार किया। कोर्ट ने आदेश दिया कि वक्फ बोर्ड में तीन से अधिक गैर-मुस्लिम सदस्य शामिल नहीं किए जाएंगे। साथ ही, किसी भी वक्फ परिषद में कुल चार से अधिक गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं होंगे।
अदालत का रुख
सीजेआई ने कहा कि कानून की संवैधानिकता को चुनौती केवल दुर्लभतम मामलों में ही स्वीकार की जाती है। प्रथम दृष्टया अध्ययन के बाद अदालत ने पाया कि कुछ प्रावधानों को संरक्षण देना आवश्यक है, इसलिए उन पर अंतरिम रोक लगाई गई है।





