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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:34 · नई दिल्ली संस्करण

आपातकाल पर मुख्यमंत्रियों का हमला, कांग्रेस की मानसिकता पर उठाए सवाल

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
आपातकाल पर मुख्यमंत्रियों का हमला, कांग्रेस की मानसिकता पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। देश में आपातकाल की 51वीं बरसी मनाई जा रही है। आपातकाल को काले अध्याय के रूप में याद किया जाता है। केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद इस दिन को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में भी मनाया जाता है। इसी क्रम में गुरुवार को 'संविधान हत्या दिवस' के अवसर पर कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "25 जून 1975 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह काला अध्याय है, जब 'आपातकाल' थोप कर देश की संवैधानिक आत्मा को कुचलने का प्रयास किया गया।

सत्ता के अहंकार में कांग्रेस की ओर से थोपे गए 'आपातकाल' के अंधकार ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व नागरिक अधिकारों को गहरी चोट पहुंचाई। उस कठिन दौर में कठोर यातनाएं सहकर लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सभी महान लोकतंत्र सेनानियों को कोटिश: नमन।"

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि 25 जून 1975 की वह रात भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय है, जिसे देश आज 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में स्मरण कर रहा है।

आपातकाल भारत के लोकतंत्र और संविधान पर हुआ सबसे बड़ा आघात था।

उन्होंने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के निर्णय ने लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को गहरी चोट पहुंचाई। उस दौर में नागरिक अधिकारों का हनन हुआ, प्रेस की स्वतंत्रता पर ताले लगाए गए और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंट दिया गया। सत्ता के अहंकार में लिया गया यह निर्णय कांग्रेस की तानाशाही मानसिकता का सबसे बड़ा प्रतीक है। दुर्भाग्य से कांग्रेस आज भी इसी मानसिकता से ग्रसित है।

रेखा गुप्ता ने यह भी कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले अनेक लोगों ने दमन और असहनीय यातनाओं का सामना किया। यह दिवस हमें लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक मर्यादाओं और नागरिक अधिकारों की रक्षा के संकल्प को और मजबूत करने की प्रेरणा देता है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी आपातकाल के समय यातनाओं, दमन और प्रताड़नाओं के बावजूद लोकतंत्र की रक्षा व पुनर्स्थापना के लिए संघर्ष करने वाले सभी लोकतंत्र सेनानियों और राष्ट्रभक्तों को नमन किया।

उन्होंने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "भारत के लोकतांत्रिक इतिहास पर काला अध्याय माने जाने वाले 'आपातकाल' को वर्ष 1975 में आज ही के दिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार की ओर से देश पर थोपा गया था। यह वह दौर था, जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, नागरिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों का खुलेआम दमन किया गया तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास हुआ।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने लिखा, "25 जून 1975 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज है। कांग्रेस सरकार की ओर से सत्ता के अहंकार में उस दिन लगाए गए आपातकाल ने संविधान की मूल भावना, नागरिक स्वतंत्रताओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को गंभीर आघात पहुंचाया। आज 'संविधान हत्या दिवस' पर मैं उन सभी लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं, जिन्होंने लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए संघर्ष, यातनाएं और बलिदान सहन किए।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पोस्ट किया, "25 जून 1975, भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक काला अध्याय, जब संवैधानिक मूल्यों को कुचला गया और देश पर आपातकाल थोपा गया। उन सभी देशभक्तों को नमन, जो तानाशाही के खिलाफ मजबूती से डटे रहे और लोकतंत्र की बहाली के लिए अथक संघर्ष किया। आइए, हम संविधान की रक्षा करने और स्वतंत्र भारत के लोकतांत्रिक आदर्शों को बनाए रखने के अपने सामूहिक संकल्प को दोहराएं।"

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