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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:24 · नई दिल्ली संस्करण

छत्तीसगढ़ की नई लॉजिस्टिक नीति 2025: बस्तर और सरगुजा में विकास और शांति की नई शुरुआत

राष्ट्रीय सागर डेस्क4 मिनट का पठन
छत्तीसगढ़ की नई लॉजिस्टिक नीति 2025: बस्तर और सरगुजा में विकास और शांति की नई शुरुआत

छत्तीसगढ़ की नई लॉजिस्टिक नीति 2025:

बस्तर और सरगुजा में विकास और शांति की

नई शुरुआत

रायपुर, 30 जून 2025 — छत्तीसगढ़

सरकार ने प्रदेश को राष्ट्रीय लॉजिस्टिक हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में

एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित

मंत्रिमंडल की बैठक में “राज्य लॉजिस्टिक नीति 2025” को स्वीकृति दी गई। यह नीति महज व्यापारिक ढांचा विकसित करने

तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य प्रदेश के आदिवासी

और नक्सल प्रभावित इलाकों — विशेषकर बस्तर और सरगुजा — को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। इस नीति को सरकार ने

नक्सल उन्मूलन का नया रणनीतिक हथियार बताया है, जो

बंदूक के बजाय विकास की रौशनी से हिंसा को खत्म करने का लक्ष्य रखती है।

अब तक बस्तर जैसे क्षेत्र अधिकतर हिंसा और उपेक्षा के प्रतीक

माने जाते थे, जहां न सड़कों की सुविधा थी, न ही रोजगार के अवसर। लेकिन इस लॉजिस्टिक नीति के लागू होने के

बाद वहाँ आधुनिक गोदाम, कोल्ड स्टोरेज, लॉजिस्टिक

हब, एयर कार्गो टर्मिनल और ट्रांसपोर्ट

केंद्रों की स्थापना की जाएगी। इन संरचनाओं के साथ सड़कों का निर्माण होगा,

निवेश बढ़ेगा और सबसे अहम बात — स्थानीय

युवाओं को रोजगार मिलेगा, जिससे वे हिंसा नहीं बल्कि भविष्य को

अपनाएंगे।

सरकार ने आदिवासी क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान किए हैं।

बस्तर और सरगुजा जैसे इलाकों में निवेश करने वाली कंपनियों को 10% अतिरिक्त अनुदान और अधोसंरचना लागत में 40% तक की सहायता मिलेगी। इससे इन क्षेत्रों में निजी निवेश को

प्रोत्साहन मिलेगा और आर्थिक गतिविधियाँ तेज़ होंगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने

स्पष्ट कहा है, "बस्तर और सरगुजा को अब पिछड़ेपन से नहीं,

बल्कि विकास से पहचाना जाएगा। यह नीति युवाओं को घर के पास ही

रोजगार देगी और उनका भविष्य संवारेगी।"

इस नीति के तहत वेयरहाउस, कोल्ड

स्टोरेज, लॉजिस्टिक पार्क, ड्राय

पोर्ट, और एयर कार्गो टर्मिनल जैसी संरचनाओं का

निर्माण किया जाएगा। किसान अब अपनी उपज को जल्दी ख़राब होने से बचाने के लिए पास

के कोल्ड स्टोरेज में रख सकेंगे, जिससे उनका आर्थिक नुकसान रुकेगा। वहीं

व्यापारियों को सामान स्टोर करने के लिए आधुनिक सुविधा मिलेगी, और ई-कॉमर्स कंपनियाँ भी छत्तीसगढ़ के भीतर तेजी से प्रसार कर

सकेंगी। इन गतिविधियों से ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।

सरकार ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए ज़मीन खरीद, पंजीयन और अनुमतियों में भी रियायतें दी हैं। 500 करोड़ से अधिक का निवेश करने वालों या 1000 से अधिक लोगों को रोजगार देने वालों को अतिरिक्त सहायता दी जाएगी।

इससे राज्य में बड़े निवेश को गति मिलेगी और स्थानीय स्तर पर व्यापक आर्थिक सुधार

संभव होंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘पीएम

गति शक्ति योजना’ से प्रेरित यह नीति केंद्र सरकार की

तकनीकी और वित्तीय सहायता से भी जुड़ी होगी, जिससे

राज्य की लॉजिस्टिक क्षमता राष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा बन सकेगी। यह नीति न केवल

उद्योगपतियों के लिए है, बल्कि आदिवासी युवाओं, किसानों, ट्रक चालकों और गोदाम कर्मियों के लिए

भी अवसर लेकर आई है। कौशल विकास और प्रशिक्षण केंद्रों की भी व्यवस्था की गई है,

जिससे स्थानीय युवाओं को दक्ष बनाकर नौकरी दी जा सके।

इस नीति की एक और विशेषता इसका पर्यावरण-संवेदनशील दृष्टिकोण

है। यदि कोई निवेशक ग्रीन लॉजिस्टिक जैसे इलेक्ट्रिक ट्रक, सौर

ऊर्जा से चलने वाले गोदाम या जल संरक्षण तकनीक अपनाता है, तो

उसे 5% अतिरिक्त अनुदान मिलेगा। इससे प्रदेश

में पर्यावरण संतुलन बना रहेगा और सतत विकास की राह प्रशस्त होगी।

जब रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर

और कोरबा जैसे शहर आधुनिक लॉजिस्टिक हब में बदलेंगे, और

किसान अपनी उपज सीधे पास के वेयरहाउस तक पहुंचा सकेंगे, तो

इसका लाभ न केवल व्यापार को मिलेगा, बल्कि

गांवों की अर्थव्यवस्था और जीवनशैली भी बदलेगी। बस्तर, जिसे

अब तक केवल जंगलों और हिंसा के लिए जाना जाता था, वह

अब फल, सब्ज़ियाँ, औषधियाँ

और मशीनों का प्रमुख आपूर्ति क्षेत्र बनकर उभरेगा।

छत्तीसगढ़ की लॉजिस्टिक नीति 2025 एक

ऐसा क्रांतिकारी कदम है जो न केवल राज्य को व्यापारिक मानचित्र पर मजबूत करेगा,

बल्कि बस्तर और सरगुजा के युवाओं को बंदूक से किताब, बेरोजगारी से रोज़गार और भय से भविष्य की ओर ले जाएगा। यह नीति

वास्तव में “विकास के ज़रिए शांति” की नई परिभाषा लिख रही है।

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