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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:47 · नई दिल्ली संस्करण

छत्तीसगढ़ आरक्षक भर्ती पर हाई कोर्ट की रोक, 6 हजार पदों पर नई नियुक्तियां स्थगित

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
छत्तीसगढ़ आरक्षक भर्ती पर हाई कोर्ट की रोक, 6 हजार पदों पर नई नियुक्तियां स्थगित

बिलासपुर,। छत्तीसगढ़ में चल रही आरक्षक भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 6 हजार पदों पर हो रही आरक्षक भर्ती के तहत नई नियुक्तियों पर अंतरिम रोक लगा दी है।

हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद अगली सुनवाई तक पुलिस विभाग किसी भी उम्मीदवार को जॉइनिंग लेटर जारी नहीं कर सकेगा। वहीं, राज्य सरकार को मामले में जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है। प्रकरण की अगली सुनवाई 23 फरवरी को होगी।

दरअसल, पुलिस विभाग की ओर से प्रदेश के सभी जिलों में आरक्षकों के रिक्त पदों को भरने के लिए लिखित एवं शारीरिक दक्षता परीक्षा आयोजित की गई थी। इसी प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की गईं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता मतीन सिद्दिकी ने कोर्ट को बताया कि शारीरिक दक्षता परीक्षा में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया है। उन्होंने बताया कि इसका सबसे ठोस प्रमाण बिलासपुर के एसएसपी एवं चयन समिति के अध्यक्ष द्वारा 19 दिसंबर 2024 को पुलिस मुख्यालय रायपुर को लिखा गया पत्र है। इस पत्र में फिजिकल टेस्ट के दौरान सामने आई गड़बड़ियों की आधिकारिक जानकारी दी गई थी।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि भर्ती प्रक्रिया पूरे प्रदेश के लिए एक ही सेंट्रलाइज्ड विज्ञापन के माध्यम से संचालित की जा रही है और सभी जिलों में शारीरिक परीक्षा कराने वाली आउटसोर्स कंपनी भी एक ही है। ऐसे में आशंका जताई गई कि बिलासपुर की तरह राज्य के अन्य केंद्रों पर भी धांधली हुई हो सकती है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट को यह भी बताया गया कि कुल 6 हजार पदों में से अब तक लगभग 2,500 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी किए जा चुके हैं।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यदि आगे भी नियुक्तियां जारी रहीं, तो जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और बाद में निष्पक्ष कार्रवाई करना मुश्किल हो जाएगा।

वहीं, शासन की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने आरोपों का विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि शिकायत केवल एक केंद्र तक सीमित है और इसे पूरे प्रदेश की भर्ती प्रक्रिया से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया में सामने आई गड़बड़ियों को गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई या अंतिम निर्णय आने तक किसी भी नए नियुक्ति आदेश पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले के बाद अब सभी की नजरें 23 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।

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