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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:38 · नई दिल्ली संस्करण

सुकमा : सोलर स्ट्रीट लाइट से जगमगाया जगरगुंडा, जहां नक्सलियों ने बैंक लूट लिया, काट दी थी सड़क

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
सुकमा : सोलर स्ट्रीट लाइट से जगमगाया जगरगुंडा, जहां नक्सलियों ने बैंक लूट लिया, काट दी थी सड़क

सुकमा। दक्षिण बस्तर के दुर्गम और घने जंगलों के बीच बसा जगरगुंडा, जो कभी नक्सली भय और अलगाव का दूसरा नाम बन चुका था, आज विकास की एक नई इबारत लिख रहा है। वर्ष 2006 के काले दौर के बाद, जहां नक्सली हिंसा ने इस इलाके को बाहरी दुनिया से पूरी तरह काट दिया था, वहां आज पहली बार सोलर स्ट्रीट लाइट की रोशनी ने दशकों पुराने अंधेरे को परास्त कर दिया है। यह केवल बिजली की रोशनी नहीं है, बल्कि उस भरोसे की वापसी है जिसे नक्सली हिंसा और बुनियादी ढांचों के विनाश ने गहरे जख्म दिए थे।वर्ष 2006 के बाद जगरगुंडा की स्थिति किसी टापू जैसी हो गई थी। नक्सलियों द्वारा पुल-पुलियों और सड़कों को निशाना बनाए जाने के कारण आवागमन के तमाम रास्ते बंद हो गए थे। प्रशासनिक पहुंच इतनी सीमित थी, कि ग्रामीणों को राशन के लिए भी छह-छह महीनों का इंतजार करना पड़ता था। जब सुरक्षाबलों की संगीनों के साये में राशन के ट्रक पहुंचते थे, तो पूरा गांव उसे किसी बड़े उत्सव की तरह मनाता था, क्योंकि वही उनकी जीवन रेखा थी। इस दौरान स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं भी दम तोड़ चुकी थीं और सूरज ढलते ही पूरा इलाका सन्नाटे और असुरक्षा की चादर ओढ़ लेता था।गांव के इतिहास में एक काला अध्याय वह भी था जब यहां के एक मात्र बैंक को लूट लिया गया था। उस घटना ने न केवल आर्थिक गतिविधियों को ठप्प कर दिया, बल्कि सरकारी तंत्र पर ग्रामीणों के विश्वास को भी हिलाकर रख दिया था। लेकिन वक्त के साथ प्रशासन की दृढ़ इच्छाशक्ति और सुरक्षाबलों के बढ़ते कदमों ने तस्वीर बदलनी शुरू की। आज वही बैंक फिर से पूरी सक्रियता के साथ संचालित हो रहा है, जिससे ग्रामीणों को पेंशन और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके खातों में मिल रहा है। बैंक की वापसी ने यहां के निवासियों में खोया हुआ आत्मविश्वास फिर से जगा दिया है।

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