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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:08 · नई दिल्ली संस्करण

केंद्र सरकार ने अयोध्या बाईपास योजना को गति देने के लिए कई कदम उठाए

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
केंद्र सरकार ने अयोध्या बाईपास योजना को गति देने के लिए कई कदम उठाए

पिछले दो वर्षों में 131 से अधिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के व्यापक क्षेत्र-आधारित सामाजिक-आर्थिक विकास का आकलन करने के लिए पीएम गतिशक्ति के अंतर्गत नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप-एनपीजी की 64 बैठकें आयोजित की गई हैं। 52वीं एनपीजी बैठक के दौरान अयोध्या बाईपास परियोजना का मूल्यांकन एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना के रूप में किया गया था।

अयोध्या बाईपास परियोजना 67.57 किलोमीटर की ( जिसमे 4/6 लेन उत्तरी अयोध्या बाईपास का निर्माण, कुल लंबाई 35.40 किलोमीटर + 4/6 लेन दक्षिणी अयोध्या बाईपास का निर्माण; कुल लंबाई 32.172 किलोमीटर है) ग्रीनफील्ड परियोजना है जो लखनऊ, बस्ती और गोंडा जैसे प्रमुख जिलों को समाहित करेगी। यह परियोजना इन तीन जिलों में पर्यटक और तीर्थ स्थलों सहित आर्थिक, सामाजिक और आर्थिक आपूर्ति श्रृखंला प्रबन्धन के केन्द्रों के बीच सम्पर्क में सुधार की सुविधा प्रदान करेगी।

चित्र 1 अयोध्या- क्षेत्रीय सम्पर्क अयोध्या दो आर्थिक केंद्रों (लखनऊ और गोरखपुर) के बीच स्थित है और चमड़ा, इंजीनियरिंग सामान, भवन निर्माण सामग्री, लोहा और इस्पात इत्यादि जैसी प्रमुख वस्तुएं इस नगर से होकर गुजरती हैं, इसलिए इस बाईपास मार्ग के निर्माण से निर्बाध माल प्रवाह की निर्बाध सुविधा मिलेगी और भीड़भाड़ भी कम होगी।

इस बाईपास से अयोध्या के आसपास के आठ प्रभाव क्षेत्रों में यात्री और मालवाहक वाहनों के आवागमन (2023 में 89,023 और 2033 में 216,928) में कई प्रकार की पूर्वानुमानित वृद्धि को पूरा करने की आशा है, राष्ट्रीय राजमार्ग (जैसे एनएच -27: लखनऊ-अयोध्या-गोरखपुर; एनएच -330ए : रायबरेली-अयोध्या; एनएच -330: सुल्तानपुर-अयोध्या-गोंडा और एनएच -135A: अकबरपुर-अयोध्या) में भी यात्रियों और विभिन्न प्रकार के सामान की निर्बाध आवाजाही को भी सक्षम बनाएगा और यात्रा में लगने वाले समय को भी महत्वपूर्ण स्तर तक कम कर देगा।

यह परियोजना रेलवे स्टेशनों (अयोध्या रेलवे स्टेशन, सोहवाल रेलवे स्टेशन, एएन देव नगर रेलवे स्टेशन और अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन) और हवाई अड्डे (अयोध्या हवाई अड्डे पर) जैसे एकीकृत बुनियादी ढांचे के साथ बहु-विधता (मल्टी –मॉडलिटी) को बढ़ाएगी।

इस परियोजना की परिकल्पना नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप बैठकों में मूल्यांकन की गई अन्य प्रस्तावित ऐसी परियोजनाओं के साथ पूरक और समन्वयन लाने के लिए की गई है, जिसमें (i) प्रयागराज - रायबरेली परियोजना (उत्तर प्रदेश राज्य में प्रयागराज सिटी बाईपास का निर्माण (कुल लंबाई- 64.763 किमी); (ii) गोरखपुर -सिलीगुड़ी कॉरिडोर-गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) से सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) तक परियोजना विस्तार का विकास; (iii) गोरखपुर-बरेली कॉरिडोर-गोरखपुर से रामपुर तक परियोजना विस्तार का विकास शामिल है।

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