सीता की याचिका से शिबू सोरेन की बढ़ी मुसीबतें , पैसे लेकर वोट देने वाले एमपी-एमएलए पर अलग-अलग मामलों में चलेगा मुकदमा !

सीता की याचिका से शिबू सोरेन की बढ़ी मुसीबतें , पैसे लेकर वोट देने वाले एमपी-एमएलए पर अलग-अलग मामलों में चलेगा मुकदमा !
रांची: सांसद और विधायकों द्वारा रिश्वत लेकर वोट देने या सदन में सवाल पूछने पर अपराधिक मुकदमों से मिली छूट वाले विशेषाधिकार को सुप्रीम कोर्ट की कांस्टीट्यूशन बेंच खारिज कर दिया है। सोमवार को सुनाए गए फैसले के बाद झारखंड में सियासी तौर पर रसूखदार सोरेन परिवार की मुसीबतें बढ़ गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष शिबू सोरेन और उनकी बहू सीता सोरेन पर रिश्वतखोरी के अलग-अलग मामलों में मुकदमा चलना तय माना जा रहा है। शिबू सोरेन फिलहाल राज्यसभा के सांसद हैं, जबकि सीता सोरेन झारखंड विधानसभा में जामा क्षेत्र की विधायक। शिबू सोरेन और उनकी पार्टी झामुमो के तीन अन्य तत्कालीन सांसदों शैलेंद्र महतो, सूरज मंडल और साइमन मरांडी पर 1993 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को बचाने के लिए घूस लेकर वोट देने का आरोप था, जबकि सीता सोरेन पर 2012 में हुए झारखंड में राज्यसभा चुनाव में एक प्रत्याशी को वोट देने के एवज में रिश्वत लेने का आरोप है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि रिश्वत लेकर सदन में वोट देने या सवाल पूछने पर सांसदों या विधायकों को विशेषाधिकार के तहत मुकदमे से छूट नहीं मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपना ही 25 साल पुराना फैसला पलटा है। 1998 में जस्टिस पीवी नरसिम्हा ने जो फैसला सुनाया था, उसमें सांसदों और विधायकों को सदन में भाषण देने या वोट के लिए रिश्वत लेने पर मुकदमे से छूट दी गई थी। इसी केस का हवाला देकर झामुमो विधायक सीता सोरेन ने राज्यसभा हॉर्स ट्रेडिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत की मांग की थी लेकिन पूरा मामला उलटा पड़ गया।





