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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:25 · नई दिल्ली संस्करण

कैबिनेट ने तीन मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को दी मंजूरी, भारतीय रेलवे का नेटवर्क 389 किलोमीटर बढ़ेगा

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
कैबिनेट ने तीन मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को दी मंजूरी, भारतीय रेलवे का नेटवर्क 389 किलोमीटर बढ़ेगा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों पर कैबिनेट कमेटी (सीसीईए) की बैठक में 18,509 करोड़ रुपए (अनुमानित) लागत वाले तीन रेलवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है।

सीसीईए की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इन प्रोजेक्ट्स में कसारा – मनमाड (तीसरी और चौथी लाइन), दिल्ली – अंबाला (तीसरी और चौथी लाइन) और बल्लारी – होसपेटे (तीसरी और चौथी लाइन) शामिल हैं।

बढ़ी हुई लाइन क्षमता से आवागमन में मजबूत सुधार होगा, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी।

ये मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ को कम करने के लिए तैयार किए गए हैं।

सीसीईए ने आगे बताया कि यह तीन रेलवे प्रोजेक्ट्स दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक के 12 जिलों से होकर गुजरेंगे और इससे भारतीय रेलवे का नेटवर्क करीब 389 किलोमीटर बढ़ेगा। इन प्रोजेक्ट्स से 3,902 गांव तक कनेक्टिविटी मजबूत होगी और करीब 97 लाख लोगों को फायदा होगा।

यह प्रोजेक्ट्स प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए भारत के विजन के अनुरूप हैं, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

सीसीईए के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट्स प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनाए गए हैं, जिसमें एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से बहु-मार्गीय संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

इन प्रोजेक्ट्स से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।

प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों, जिनमें भावली बांध, श्री घाटंदेवी, त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, श्री माता वैष्णो देवी कटरा/श्रीनगर और हम्पी (यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल), बल्लारी किला, दारोजी स्लॉथ बियर अभयारण्य, तुंगभद्रा बांध, केंचनागुड्डा और विजया विट्टला मंदिर आदि प्रमुख आकर्षणों के लिए रेल संपर्क में सुधार होगा।

सीसीईए ने कहा कि प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स कोयला, इस्पात, लौह अयस्क, सीमेंट, चूना पत्थर/बॉक्साइट, कंटेनर, खाद्यान्न, चीनी, उर्वरक, तेल आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं।

क्षमता वृद्धि कार्यों से प्रति वर्ष 96 मिलियन टन की अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता प्राप्त होगी। रेलवे पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन माध्यम होने के कारण जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की रसद लागत को कम करने में सहायक होगा, साथ ही ये प्रोजेक्ट्स तेल आयात (22 करोड़ लीटर) को कम करेगा और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन (111 करोड़ किलोग्राम) को घटाएगा, जो 4 करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है।

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