₹1 लाख करोड़ की RDI योजना को मंत्रिमंडल की हरी झंडी – अब भारत बनेगा रिसर्च और इनोवेशन का वैश्विक केंद्र

₹1 लाख करोड़ की RDI योजना को मंत्रिमंडल की हरी झंडी – अब भारत बनेगा रिसर्च और इनोवेशन का वैश्विक केंद्र
नई दिल्ली, 1 जुलाई 2025 – देश में रिसर्च, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को नई रफ्तार देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए ₹1 लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान, विकास और नवोन्मेषण (RDI) योजना को मंजूरी दे दी। यह योजना भारत के इनोवेशन इको-सिस्टम को न केवल मजबूत करेगी, बल्कि भारत को 2047 तक एक विकसित, आत्मनिर्भर और वैश्विक प्रौद्योगिकी शक्ति के रूप में उभरने का मार्ग प्रशस्त करेगी।
क्या है RDI योजना का उद्देश्य?
RDI (Research, Development and Innovation) योजना का मूल उद्देश्य है भारत के निजी क्षेत्र को रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में आगे लाना, खासकर उन क्षेत्रों में जो आने वाले समय में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के केंद्र में होंगे – जैसे AI, स्पेस टेक, क्लीन एनर्जी, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक, डिफेंस टेक्नोलॉजी, और ग्रीन हाइड्रोजन।
यह योजना एक स्ट्रक्चर्ड फाइनेंसिंग मॉडल के तहत निजी कंपनियों को दीर्घकालिक, कम या शून्य ब्याज दर पर फंडिंग देगी ताकि वे रिसर्च, नए टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट और बड़े स्तर पर इनोवेशन प्रोजेक्ट्स में निवेश कर सकें।
RDI योजना क्यों है क्रांतिकारी?
फंडिंग की कमी दूर होगी – अक्सर इनोवेटिव स्टार्टअप्स और निजी कंपनियों को रिसर्च के लिए पूंजी नहीं मिल पाती थी। RDI योजना अब उन्हें सस्ती दरों पर पूंजी उपलब्ध कराएगी।
प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भरता – विदेशी टेक्नोलॉजी पर निर्भरता घटेगी और भारत अपनी टेक्नोलॉजी खुद विकसित कर सकेगा।
Deep-Tech फंडिंग को बढ़ावा – अब cutting-edge टेक्नोलॉजी जैसे कि space robotics, quantum chips, biosensors, आदि में भारत का इन्वेस्टमेंट बढ़ेगा।
प्राइवेट सेक्टर की भूमिका मजबूत होगी – इनोवेशन अब केवल सरकारी प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत का प्राइवेट सेक्टर भी वैश्विक स्तर की R&D में बड़ी भूमिका निभाएगा।
कैसे काम करेगा फंडिंग सिस्टम?
RDI योजना में द्विस्तरीय (two-tier) फाइनेंसिंग मॉडल अपनाया गया है:
पहला स्तर (Level-1):
ANRF (Anusandhan National Research Foundation) के अंतर्गत एक Special Purpose Fund (SPF) बनेगा।
यह फंड विभिन्न सेक्टर-वाइज फंड मैनेजर्स को राशि आवंटित करेगा।
दूसरा स्तर (Level-2):
सेक्टर फंड मैनेजर ये राशि आगे R&D प्रोजेक्ट्स, स्टार्टअप्स, और इनोवेशन यूनिट्स को देंगे –
कम ब्याज या बिना ब्याज वाले लोन के रूप में
कुछ मामलों में इक्विटी निवेश के रूप में भी
स्टार्टअप्स को initial risk capital भी इस स्कीम से मिल सकेगा।
कौन होंगे योजना के प्रमुख संचालनकर्ता?
योजना की रणनीतिक दिशा ANRF के गवर्निंग बोर्ड द्वारा तय की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करेंगे।
Empowered Group of Secretaries (EGOS) कैबिनेट सचिव के नेतृत्व में योजना की निगरानी करेगा और समय-समय पर आवश्यक परिवर्तन की अनुमति देगा।
योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) को दी गई है, जो इस पूरी प्रक्रिया का नोडल विभाग होगा।
किन क्षेत्रों पर होगा फोकस?
RDI योजना विशेष रूप से Sunrise Sectors और Strategic Domains पर फोकस करेगी, जैसे:
Clean & Renewable Energy (Hydrogen, Solar, Battery Tech)
Aerospace & Defense
Semiconductor & Chip Manufacturing
Quantum Computing
Artificial Intelligence & Machine Learning
Biotech & Pharma
Cybersecurity & Space Tech
Advanced Materials & Robotics
भारत के लिए क्या होगा असर?
यह योजना भारत को Technology Importer से Technology Exporter बनाएगी।
करोड़ों युवाओं को नौकरी और इनोवेशन के अवसर मिलेंगे।
देश का इनोवेशन स्कोर और Global Innovation Index में रैंकिंग बेहतर होगी।
2047 के विकसित भारत विजन को टेक्नोलॉजी से सशक्त आधार मिलेगा।
RDI योजना भारत के भविष्य की नींव है। जब सरकार ₹1 लाख करोड़ का पूंजी निवेश कर रही है, तो वह यह संकेत दे रही है कि आने वाले वर्षों में भारत का भविष्य नॉलेज आधारित, टेक्नोलॉजी आधारित और आत्मनिर्भरता आधारित होगा।
यह योजना भारत की अगली पीढ़ी के वैज्ञानिकों, इनोवेटर्स और उद्यमियों के लिए सपनों का मंच है। और यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह योजना भारत को इनोवेशन की दुनिया में एक वैश्विक नेता बना सकती है।





