कांवड़ यात्रा पर बयान देकर कांग्रेस और सपा ने दिखाई अपनी सनातन विरोधी सोच: डॉ. सुधांशु त्रिवेदी का करारा प्रहार

कांवड़ यात्रा पर बयान देकर कांग्रेस और सपा ने दिखाई अपनी सनातन विरोधी सोच: डॉ. सुधांशु त्रिवेदी का करारा प्रहार
नई दिल्ली, जुलाई 2025 — देश में सनातन परंपराओं और आस्था के प्रतीकों पर एक बार फिर विपक्षी दलों की बयानबाजी ने विवाद को जन्म दे दिया है। कांवड़ यात्रा, जो श्रावण मास में शिवभक्तों की गहरी धार्मिक आस्था और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है, उस पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन के बयान न केवल असंवेदनशील रहे, बल्कि एक गंभीर वैचारिक प्रदूषण को भी उजागर करते हैं।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने दोनों नेताओं को आड़े हाथों लिया और उनकी विचारधारा को “सनातन विरोधी, राष्ट्रविरोधी और वोटबैंक परस्त मानसिकता” करार दिया। उन्होंने कहा कि ये बयान सिर्फ संयोग नहीं हैं, बल्कि राहुल गांधी की हिन्दू विरोधी राजनीति की कड़ियाँ हैं।
कांग्रेस का एजेंडा: सनातन को बदनाम करना, आस्था का मजाक उड़ाना
डॉ. त्रिवेदी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा:
“दिग्विजय सिंह और एसटी हसन के बयान उसी वैचारिक खाके से निकले हैं, जिसे राहुल गांधी अपनी नफरत की राजनीति के ज़रिए बढ़ावा दे रहे हैं। राहुल जहां जाते हैं, वहां कभी ‘वैदिक हिन्दुत्व को खत्म करने’ के सम्मेलन होते हैं, तो कभी ‘सनातन धर्म का उन्मूलन’ की खुली चर्चा होती है।”
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस अब ऐसी पार्टी बन चुकी है जो भारत की जड़ों को खोदने में जुटी है। कांवड़ यात्रा को प्लेट और सुविधाओं से जोड़कर सांप्रदायिक रंग देना, हिन्दू समाज की आस्था का अपमान है।
दिग्विजय सिंह: आतंकियों के लिए ‘सम्मान’, श्रद्धालुओं के लिए ‘संदेह’
डॉ. त्रिवेदी ने कटाक्ष करते हुए कहा:
“दिग्विजय सिंह को ज़ाकिर नाइक शांति का प्रतीक लगता है, ओसामा बिन लादेन ‘ओसामा जी’ लगते हैं, और हाफिज सईद को ‘साहब’ कहकर संबोधित करते हैं। लेकिन यही नेता जब लाखों शिवभक्त कांवड़ यात्रा में हिस्सा लेते हैं, तो उसमें उन्हें सांप्रदायिकता नजर आती है।”
यह वही मानसिकता है जो देश की धार्मिक परंपराओं से द्वेष रखती है, लेकिन आतंकवादियों को सम्मान देने में संकोच नहीं करती।
एसटी हसन: किसके साथ खड़े हैं आप?
एसटी हसन के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. त्रिवेदी ने पूछा:
“आप उन लोगों के साथ क्यों खड़े होना चाहते हैं, जो अपना नाम छिपाकर समाज में भ्रम फैलाते हैं, और फिर जब सरकार कार्रवाई करती है, तो आप धार्मिक रंग देकर उन्हें बचाने की कोशिश करते हैं?”
कांग्रेस की जड़ में है भ्रम और देशविरोध
डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस नेता देश और विदेश में फर्क नहीं कर पा रहे हैं। राहुल गांधी खुद अधिकांश समय विदेश में रहते हैं और उनकी पार्टी के नेता इतिहास और भूगोल दोनों से अनभिज्ञ हैं।
उन्होंने पूर्व पुलिस अधिकारी अजय कुमार के बयान पर तंज कसते हुए कहा:
“क्या यह मान लिया जाए कि एक पूर्व अधिकारी को ये नहीं पता कि गिलगिट-बाल्टिस्तान और पीओके भारत का हिस्सा है? या फिर ‘मोदी विरोध’ की बीमारी ने उनकी बुद्धि को कुंद कर दिया है?”
‘मोदी विरोध’ के चश्मे को उतारिए, देश का सच्चा नक्शा देखिए
डॉ. त्रिवेदी ने कांग्रेस को दो टूक सलाह दी:
“आप जब तक मोदी विरोध के चश्मे से दुनिया देखेंगे, तब तक देश का सच्चा स्वरूप और सनातन संस्कृति की गरिमा आपको नजर नहीं आएगी। भारत सिर्फ राजनीतिक सत्ता का मैदान नहीं, बल्कि एक संस्कारों और विश्वास का राष्ट्र है।”
आस्था पर राजनीति नहीं, श्रद्धा का सम्मान करें
भाजपा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कांवड़ यात्रा या किसी भी धार्मिक परंपरा का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कांग्रेस और सपा जैसी पार्टियों की वोटबैंक की राजनीति देश की संस्कृति को खोखला करने की साजिश है, जिसे जनता अब भलीभांति समझ चुकी है।
डॉ. त्रिवेदी के अनुसार, यह समय है कि विपक्ष आत्मचिंतन करे और समझे कि अब भारत बदल चुका है। यहां राहुल गांधी की भ्रमित विचारधारा नहीं, बल्कि राम, शिव और राष्ट्रभक्ति की चेतना जाग चुकी है।





