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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:35 · नई दिल्ली संस्करण

कांस्य युग की खोज से मिले भारत-अजरबैजान के ऐतिहासिक संबंधों के संकेत

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
कांस्य युग की खोज से मिले भारत-अजरबैजान के ऐतिहासिक संबंधों के संकेत

नई दिल्ली। स्वास्तिक को दुनिया के सबसे प्राचीन और व्यापक रूप से प्रचलित पवित्र प्रतीकों में से एक माना जाता है। हिंदू धर्म में यह शुचिता, समृद्धि, कल्याण और जीवन के शाश्वत चक्र का प्रतीक है। हजारों वर्षों से इसका उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों, मंदिरों, यज्ञों और विभिन्न पर्व-त्योहारों में होता आ रहा है। भारतीय परंपरा में स्वस्तिक को मंगल और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

अब अजरबैजान से सामने आई एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक जानकारी ने इस प्राचीन प्रतीक के ऐतिहासिक महत्व को और व्यापक संदर्भ में सामने रखा है। इसकी जानकारी अजरबैजान स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स पोस्ट पर दी।

वीडियो क्लिप के साथ बयान जारी किया।

बताया कि अजरबैजान के शामखिर जिले के गराजामिरली क्षेत्र में कांस्य युग (ब्रॉन्ज एज) से संबंधित पुरातात्विक अवशेषों पर स्वास्तिक चिह्न मिले। इन अध्ययनों से संकेत मिलता है कि प्रागैतिहासिक काल में यूरेशिया के विस्तृत भूभाग में इस प्रतीक का प्रयोग विभिन्न सभ्यताओं द्वारा किया जाता था।

इसमें आगे कहा गया है कि इस तरह की खोज केवल एक प्रतीक की उपस्थिति नहीं दर्शातीं, बल्कि यह भी बताती हैं कि प्राचीन समाजों के बीच सांस्कृतिक संपर्क, विचारों का आदान-प्रदान और साझा प्रतीकात्मक परंपराएं मौजूद थीं।

इससे यह समझने में मदद मिलती है कि हजारों वर्ष पहले भी विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच सांस्कृतिक संबंध स्थापित थे।

इन साक्ष्यों ने संभावनाओं के द्वार भी खोल दिए हैं। बयान के अनुसार, इन पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण कॉकस क्षेत्र के बीच संभावित ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संपर्कों पर नए सिरे से अध्ययन की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।

ऐसे प्रतीक प्राचीन मानव सभ्यताओं की सांस्कृतिक विरासत और उनके परस्पर संबंधों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

स्वस्तिक एक अत्यंत प्राचीन प्रतीक है, जिसका प्रयोग अलग-अलग सभ्यताओं में विभिन्न अर्थों और संदर्भों में हुआ है।

हजारों साल पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता और उससे भी प्राचीन पुरातात्विक स्थलों की कई कलाकृतियों में इसका चिह्न पाया गया है। यह भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म, बौद्ध और जैन धर्म में शुभता, सौभाग्य और कल्याण का प्रतीक है।

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