'अखिलेश के बिना सब सूना है...' - कांग्रेस के 150 सीटों वाले दावे पर बृजभूषण ने जो कहा, सुनकर सब रह गए हैरान

उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर तनातनी चल रही है और इसी बीच पूर्व बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के एक बयान ने सियासी पारा हाई कर दिया है। दरअसल, दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान जब बृजभूषण शरण सिंह से सवाल किया गया कि कांग्रेस कह रही है कि वह यूपी में गठबंधन के तहत 150 सीटों से कम पर चुनाव नहीं लड़ेगी, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए दो टूक जवाब दिया - "अखिलेश के बिना सब सूना है..." और अपनी कार में बैठकर चले गए। बृजभूषण का ये बयान ऐसे वक्त आया है जब सपा-कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे पर बात नहीं बन पा रही है।
कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने साफ कहा है कि कांग्रेस 150 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी और अक्टूबर तक सीट शेयरिंग फाइनल हो जाएगी। वहीं सपा मुखिया अखिलेश यादव ने रायबरेली में कहा था कि हम भी 403 सीटों पर तैयारी कर रहे हैं, तो कांग्रेस भी 403 पर कर रही है, मतलब 806 पर तैयारी है, इसमें क्या दिक्कत है। अखिलेश का ये बयान भले ही मजाक में था, लेकिन सियासी गलियारों में इसके अलग मायने निकाले जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि अखिलेश नहीं चाहते कि गठबंधन की बातचीत से उनकी संगठनात्मक तैयारी कमजोर हो। बृजभूषण शरण सिंह का ये पहला मौका नहीं है जब उन्होंने अखिलेश की तारीफ की हो। इससे पहले भी वह कई बार सपा मुखिया की बड़ाई कर चुके हैं।
अखिलेश भी बृजभूषण पर निगेटिव टिप्पणी से कतराते हैं और उन्हें 'नेताजी' यानी मुलायम सिंह यादव का करीबी बता चुके हैं। वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने पलटवार करते हुए कहा है कि राहुल गांधी के बिना कोई कुछ नहीं है, गलतफहमी में न रहें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने संगठन और काम के आधार पर आगे बढ़ रही है। दूसरी तरफ सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने सपा-कांग्रेस गठबंधन को 'ठगबंधन' करार दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस बड़ी पार्टी है, वह सभी क्षेत्रीय दलों को निपटाने पर लगी है। जब ये खत्म हो जाएंगे तो कांग्रेस अपना राज करेगी। बृजभूषण शरण सिंह ने पहले भी कहा था कि यूपी में कांग्रेस की अपनी कोई राजनीतिक हैसियत नहीं है। वह सपा के कंधे पर सवार होकर ही कुछ सीटें जीत सकती है। उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी की सीटें उनकी काबिलियत पर नहीं, बल्कि गठबंधन की वजह से आई हैं।
अखिलेश को INDI गठबंधन से हटा दीजिए, फिर देखिए राहुल कितने बड़े योद्धा हैं। फिलहाल अखिलेश यादव आज हो रही इंडिया ब्लॉक की बैठक में खुद शामिल नहीं हुए हैं और अपने नेता को भेजा है। जबकि कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी, सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे भाग ले रहे हैं। ये बैठक मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR समेत विपक्षी एकजुटता को लेकर है। ऐसे में बृजभूषण का ये बयान कि 'अखिलेश के बिना सब सूना है' यूपी की सियासत में नए समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है। क्या बीजेपी नेता सपा-कांग्रेस में फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं या वाकई यूपी में अखिलेश ही विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा हैं, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि इस एक लाइन ने लखनऊ से दिल्ली तक सियासी हलचल तेज कर दी है।





