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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:40 · नई दिल्ली संस्करण

बिहार में सरकारी डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
बिहार में सरकारी डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध

पटना। बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने एक अहम निर्णय लेते हुए सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने शनिवार को आधिकारिक पत्र जारी कर दिया। अब राज्य के सरकारी डॉक्टर निजी क्लीनिक या अन्य स्थानों पर प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे।

यह निर्णय “सात निश्चय-3” योजना के तहत लिया गया है, जिसके अंतर्गत एलोपैथी चिकित्सा पद्धति में कार्यरत बिहार स्वास्थ्य सेवा संवर्ग, बिहार चिकित्सा सेवा संवर्ग तथा इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान के चिकित्सा सेवा संवर्ग के डॉक्टरों और मेडिकल शिक्षकों पर यह प्रतिबंध लागू होगा।

बिहार सरकार का मानना है कि निजी प्रैक्टिस के कारण कई बार डॉक्टरों का ध्यान बंट जाता है, जिससे सरकारी अस्पतालों में मरीजों को समय पर और समुचित इलाज नहीं मिल पाता। इस रोक के बाद डॉक्टरों की अस्पतालों में उपस्थिति बढ़ेगी और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है।

सरकार ने यह भी स्वीकार किया है कि इस फैसले से डॉक्टरों की आय प्रभावित हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए उन्हें गैर-अभ्यास भत्ता (नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस) (एनपीए) या अन्य प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे।

इस महत्वपूर्ण फैसले के पीछे एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिश रही है, जिसका गठन जनवरी में किया गया था। समिति की अध्यक्षता डॉ. रेखा झा ने की थी। इसमें विभिन्न चिकित्सा संस्थानों और स्वास्थ्य सेवा संघों के वरिष्ठ डॉक्टर शामिल थे। समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की सिफारिश की थी, जिसे राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस निर्णय को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा सुधार संभव है। हालांकि, इसे जमीनी स्तर पर लागू करना एक बड़ी चुनौती भी होगा। इस फैसले से सरकारी अस्पतालों की साख बढ़ने, डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित होने और आम जनता को बेहतर एवं समय पर इलाज मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इसे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम माना जा रहा है।

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