जन सुराज पर भड़के भाजपा सांसद संजय जायसवाल: “प्रशांत किशोर को जनता की परवाह नहीं, अपराधियों के सहारे रच रहे राजनीति की पटकथा”

प्रशांत किशोर पर भड़के संजय जायसवाल: "जन सुराज नहीं, अपराधियों का संगठन खड़ा कर रहे हैं"
बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार 29 जून 2025 — जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत
किशोर एक बार फिर से राजनीतिक विवादों के केंद्र में हैं। इस बार उन पर तीखा
प्रहार किया है स्थानीय सांसद और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता डॉ. संजय जायसवाल ने। उन्होंने एक प्रेस बयान में कहा कि “प्रशांत किशोर को जनता की समस्याओं, संवेदनाओं
या ज़मीनी हकीकत से कोई सरोकार नहीं है। वह केवल सत्ता तक पहुंचने के लिए एक
वैचारिक मुखौटा पहनकर राजनीति की नई पटकथा लिखने की कोशिश कर रहे हैं।”
डॉ. जायसवाल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बेतिया में एक ऐसा
व्यक्ति, जिस पर दलित समुदाय की हत्या का आरोप है,
अब खुद को जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार के रूप में प्रचारित
कर रहा है। उन्होंने कहा, “यह विडंबना ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र का अपमान है कि ऐसे व्यक्ति प्रशांत किशोर के
बैनर तले बेतिया विधानसभा से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।” उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रशांत किशोर के संगठन से जुड़े 80 प्रतिशत
लोग आपराधिक पृष्ठभूमि से
आते हैं — जिनमें से कई पर संगीन धाराओं में
मुकदमे दर्ज हैं।
संजय जायसवाल ने यह सवाल उठाया कि जब किसी संगठन की बुनियाद ही
अपराधियों और बाहुबलियों के कंधों पर खड़ी हो, तो
उस संगठन से भलाई की क्या उम्मीद की जा सकती है? उन्होंने
कहा, “एक राजनीतिक दल सिर्फ नारों और
रणनीतियों से नहीं चलता, उसमें विचारधारा, सेवा
भाव और जनता के लिए समर्पण होना चाहिए। लेकिन प्रशांत किशोर का पूरा आंदोलन सिर्फ
सोशल मीडिया और मार्केटिंग आधारित है, जिसमें
ज़मीनी सच्चाई और नैतिकता की कोई जगह नहीं।”
उन्होंने यह भी कहा कि बिहार जैसे संवेदनशील और सामाजिक दृष्टि
से जटिल राज्य में अगर अपराधियों को राजनीतिक वैधता दी जाने लगी तो यह आने वाले
समय में राज्य के लिए बहुत ही खतरनाक सिद्ध होगा। “जनता
को अब सच को पहचानना होगा। जन सुराज के नाम पर जो खेल चल रहा है, वह असल में जनविरोधी षड्यंत्र है,” उन्होंने
जोड़ते हुए कहा।
डॉ. जायसवाल के इस बयान से स्पष्ट है कि भाजपा अब प्रशांत
किशोर और उनकी पार्टी को केवल एक वैकल्पिक आंदोलन के रूप में नहीं, बल्कि एक राजनीतिक चुनौती के रूप में देखने लगी है, जो आने वाले विधानसभा चुनावों में समीकरणों को बदल सकता है।
लेकिन उनके आरोपों ने यह भी सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वास्तव में जन सुराज एक
विचारधारात्मक और नैतिक आंदोलन है या फिर सिर्फ राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा की नई
लहर?
इस पूरे प्रकरण से बिहार की राजनीति में एक बार फिर से सत्य बनाम दिखावा, नैतिकता बनाम अवसरवाद, और जनता बनाम रणनीति की बहस तेज हो गई है।





